Tuesday, 25 July 2017

 जिन बिमारियों का इलाज डॉक्टर भी नहीं कर पा रहे उनका इलाज जोंक से किया जा रहा है...

दादी-नानी की कहानियों में खून चूसने के लिए कुख्यात माने जाने वाले जीव जोंक का इस्तेमाल असाध्य बीमारियों के इलाज में किया जा रहा है। जोंक के खून चूसने की स्वाभाविक खूबी के साथ सामंजस्य बैठाते हुए चिकित्सीय जगत में इसका उपयोग स्वच्छ रक्त के बजाय दूषित रक्त को निकालने में किया जा रहा है।
नॉएडा स्थित डा. चौहान आयुर्वेद के चिकित्सा डॉ. अक्षय चौहान ने बताया कि जोंक से उपचार की विधि को आयुर्वेद में जलौकावचारण विधि की संज्ञा दी जाती है। चिकित्सा विज्ञान में इस विधि को लीच थैरेपी भी कहा जाता है। लीच थैरेपी से डायबिटिक फुट, गैंगरिन, सोरायसिस, नासूर समेत कई बीमारियों का सफलता से इलाज हो रहा है। डीप वेन थ्रंबायोसिस जिसमें पैर कटवाने की नौबत आ जाती है, में यह विधि कारगर है। डॉ. अक्षय चौहान जी ने बताया कि पिछले कुछ वर्ष के दौरान इस विधि से अनेको बहुत मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज हो चुका हैक्या है लीच थैरेपी
जोंकों को प्रभावित अंगों के ऊपर छोड़ दिया जाता है। जोंक अपने मुंह से ऐसे एंजाइम का स्राव करते हैं जो व्यक्ति को यह अहसास ही नहीं होने देते कि शरीर से खून चूसा जा रहा है। कृमि प्रजाति के इस जीव की सबसे बड़ी खासियत इसके स्लाइवा में मिलने वाला हिरुडिन नामक एंजाइम है, जो रक्त में थक्का नहीं बनने देता है। इसके स्राव से स्वच्छ रक्त का प्रवाह तेजी से होता है। जोंक दूषित रक्त को ही चूसती है। एक बार में जोंक शरीर से 5 मिलीलीटर खून चूस लेती है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक प्रभावित अंग से दूषित रक्त को पूरी तरह चूस नहीं लिया जाता। दूषित रक्त की समाप्ति से स्वच्छ रक्त प्रवाह होता है जिससे जख्म जल्दी भरते हैं।
क्यों हो रही लोकप्रिय
डायबिटिक मरीजों के लिए शल्य क्रिया काफी खतरनाक मानी जाती है। इसकी वजह जख्मों को भरने में सामान्य के मुकाबले अत्यधिक समय लगता है। इस बीच कई बीमारियों के खतरे की आशंका बन जाती है। लीच थैरेपी इन सब मुसीबतों से निजात दिलाती है। और जख्म भी जल्दी भरता है.
रखा जाता है खास ख्याल
इंफेक्शन न हो, इसके लिए एक जोंक का एक ही मरीज के लिए प्रयोग किया जाता है। दूषित रक्त चूसने के बाद इनको उल्टी कराई जाती है, ताकि ये अपने मुंह से दूषित रक्त निकाल दें।
देखिए डॉक्टर ने कैसे इस मरीज का इलाज किया
यह मरीज पिछले 8 महीने से पैर के जख्म से पीड़ित था। लगातार एंटीबायोटिक (Antibiotic) के प्रयोग के बाद भी बिलकुल भी आराम नहीं हो रहा था। और जख्म की संख्या बढ़ती जा रही थी। पैर में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है अब तो चल भी नहीं सकता। पैर का जख्म वाला हिस्सा काला हो गया था, इस मरीज की Blood Report बिलकुल नार्मल है। एलोपैथिक डॉक्टर ने बताया कि यह SCHAMBERG DISEASE WITH PUNCHED OUT ULCER है।10 दिन पहले ये मरीज डॉक्टर चौहान जी के पास आया । उन्होंने इसे आचार्य सुश्रुत के अनुसार “दुष्ट व्रण” (लीच थेरेपी) की चिकित्सा प्रारम्भ कर दी। पैर का कालापन लगभग 50% कम हो गया। 7 दिन के बाद 50 ml रक्त निकाला। रक्त निकलते ही अगले दिन मरीज ने बताया कि पैर का दर्द बिल्कुल बंद हो गया। आज इस मरीज को 13 ज़ोक (leech) लगाई। लगभग 300 ml ब्लड निकाला। मरीज के अनुसार 10 दिन में उसकी 8 महीने पुरानी बीमारी में 50% आराम हो गया हैं।
साहस हिम्मत

मित्रों कई बार हमारे जीवन ऐसा समय आता है जब हम परेशानियों से गुजर रहे होते हैं। यही वो समय है जब एक इंसान की असली परीक्षा होती है, ज्यादातर लोग अक्सर इस समय टूट जाते हैं और अपने धैर्य को खो देते हैं। लेकिन इंसान को चाहिए कि वो ऐसे समय में विवेक से काम लें अपनी शक्तियों को ना भूलें और तनिक भी घबराएं नहीं क्यूंकि चाणक्य ने कहा है कि इंसान का साहस ऐसी चीज़ है जो हर समस्या को हरा सकता है।

एक छोटा सा प्रेरक प्रसंग(Hindi Kahaniyan) है
जिसे मैं यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ –

किसी जंगल में एक गधा रहता था,एक बार गधा जंगल में घास चर रहा था। अचानक वहां एक भेड़िया आता है, वो भेड़िया सोचता है कि क्यों ना आज इस गधे का शिकार किया जाये, काफी तंदरुस्त गधा है और ज्यादा मांस भी होगा तो दो तीन दिन का काम हो जायेगा। यही सोचकर वो गधे के पास जाता है और बोलता है – अरे गधे तेरे दिन अब ख़त्म हुए मैं तुम्हें खाने जा रहा हूँ।

अचानक गधा हक्काबक्का रह जाता है और बुरी तरह घबरा जाता है फिर भी वह साहस नहीं छोड़ता। फिर कुछ सोचकर भेड़िये से बोलता है – आपका स्वागत है श्रीमान! मुझे कल साक्षात भगवान ने सपने में आकर कहा था कि कोई बड़ा दयालु और बुद्धिमान जानवर आकर मेरा शिकार करेगा और मुझे इस दुनिया के बंधन से मुक्त करायेगा। मुझे लगता है कि आप ही वो दयालु और बुद्धिमान जानवर हैं।

भेड़िया सोचता है कि वाह ये तो खुद ही मेरा शिकार बनने को तैयार है ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी इसको मारने में। गधा फिर बोलता है – लेकिन महाराज मेरी एक आखिरी इच्छा है, मैं चाहता हूँ कि आप मुझे खाने से पहले मेरी आखिरी इच्छा जरूर पूरी करें।

भेड़िया बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं कहो क्या है तुम्हारी आखिरी इच्छा? गधा विनम्रता से बोला- महाराज मेरे पैर में एक छोटा पत्थर फंस गया है क्या आप उसे निकल देंगे? भेड़िया खुश होकर बोला- वाह इतना सा काम अभी करता हूँ, कहाँ है पत्थर ? फिर भेड़िया गधे के पीछे जाकर जैसे ही उसके पैर के पास गया, गधे ने भेड़िये के चेहरे पे इतनी जोर से लात मारी कि भेड़िया बहुत दूर जाकर गिरा। फिर उसके बाद गधा पूरी ताकत के साथ वहां से भाग निकला, भेड़िया देखता रह गया।

मित्रों ये एक कहानी मात्र नहीं है इस कहानी में आपकी बहुत सारी समस्याओं का हल छिपा है। आप चाहें तो भेड़िये रूपी परेशानियों के आगे हार मान सकते हैं या उन परेशानियों को अपने साहस के दम पर हरा सकते हैं।

हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ विलक्षणता जरूर होती है और परेशानियाँ तो जीवन का एक मुख्य हिस्सा हैं, कोई अमीर(Rich) हो या गरीब(Poor), छोटा हो या बड़ा, परेशानियाँ तो सबको आती है और आपके अंदर वो क्षमता भी है जो समस्याओं को हरा सकती है बस जरूरत है तो हिम्मत दिखाने कि, साहस से काम लेने की। परेशानियाँ बड़ी नहीं होती हैं बल्कि हमारे विचार ही समस्याओं को बड़ा या छोटा बनाते हैं।
चीन के ऊपर ऋण उसकी कई ट्रिलियन GDP का 282% गुना है*।
लन्दन के इकोनामिक टाइम्स का सन्दर्भ देते हुए INDIA TODAY में अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक स्थिति पर एक विवरण छपा है। जिसके अनुसार:-
1..वर्ष 2015 के बाद से भारत विश्व मे सबसे उभरती हुई इकोनामी है जो नरेंद मोदी के अथक प्रयासो के फलस्वरूप वर्ष 2020 तक कई क्षेत्रो में चीन से आगे निकल जायेगी।
2..इकोनामिक टाइम्स कहता है कि कर्ज आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है लेकिन चीन के ऊपर तो कर्ज का अंबार है।
कर्ज GDP से 150 गुना से ज्यादा नही होना चाहिए जबकि चीन के ऊपर ऋण उसकी कई ट्रिलियन GDP का 282% गुना है। इकोनॉमिक्स कहता है कि वैसे तो अमेरिका के ऊपर उसकी GDP का 331%गुना ज्यादा रिन है लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुधार पर है और चीन की और नीचे जा रही है।
3..भारत के ऊपर ऋण उसकी GDP का 135% है जो संतुलित तो है ही,पिछले 3 सालों से घटता भी जा रहा है।
4... चीन का कुल निर्यात उसकी GDP का 21% है जो मैनुफेक्चरिंग ड्राइवेन है जिसमे से 18% केवल अमेरिका को जाता है। जो चीन की GDP का 4% है। चीन को यंहा खतरा यह हो गया कि डोनॉल्ड ट्रंम्प का चीन के राष्ट्रपति से समझौता हुआ है कि वे चीन से आयात घटाते रहेगे ताकि उनकी मैनुफेक्चरिंग अमेरिका में हो और यंहा रोजगार बढ़े।
5..चीन के विपरीत भारत की मैनुफेक्चरिंग ड्राइवेन लोकल उपयोग के ऊपर आधारित है जो कम के बजाय ज्यादा ही होती जाएगी।
6.. भारत अपने services sector का export करता है जिसके भविष्य में और बढ़ने की अपार सम्भावनाये है।
वांशिगटन में ट्रंम्प-मोदी मुलाकात वार्ता में यह तय हुआ है कि अमेरिका भारत से services sector में आयात बढ़ाएगा।
7..अब चीन के निर्यात की कुंजी ट्रंम्प के हाथ मे। जैसे-जैसे
ट्रंम्प अमेरिका में चीन से आयात किये जाने वाले मैनुफेक्चरिंग गुड्स की मैनुफेक्चरिंग यूनिट्स अमेरिका में लगाते जाएंगे वैसे-वैसे चीन का निर्यात घटता जाएगा फलस्वरूप चीन की GDP भी घटेगी।
8..चीनी बैंक दिवालाइया होने की कगार पर खड़े है क्योंकि उनके द्वारा चीन में दिए गए ऋण की रिकवरी लगभग शून्य है।

Monday, 24 July 2017


अक्षौहिणी प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था जिसका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
किसी भी अक्षौहिणी सेना के चार विभाग होते थे:
गज (हाँथी सवार)
रथ (रथी)
घोड़े (घुड़सवार)
सैनिक (पैदल सिपाही)
इसके प्रत्येक भाग की संख्या के अंकों का कुल जमा 18 आता है। एक घोडे पर एक सवार बैठा होगा. हाथी पर कम से कम दो व्यक्तियों का होना आवश्यक है, एक पीलवान और दूसरा लडने वाला योद्धा. इसी प्रकार एक रथ में दो मनुष्य और चार घोडे रहे होंगें.
एक अक्षौहिणी सेना 9 भागों में बटी होती थी:
पत्ती: 1 गज + 1 रथ + 3 घोड़े + 5 पैदल सिपाही
सेनामुख (3 x पत्ती): 3 गज + 3 रथ + 9 घोड़े + 15 पैदल सिपाही
गुल्म (3 x सेनामुख): 9 गज + 9 रथ + 27 घोड़े + 45 पैदल सिपाही
गण (3 x गुल्म): 27 गज + 27 रथ + 81 घोड़े + 135 पैदल सिपाही
वाहिनी (3 x गण): 81 गज + 81 रथ + 243 घोड़े + 405 पैदल सिपाही
पृतना (3 x वाहिनी): 243 गज + 243 रथ + 729 घोड़े + 1215 पैदल सिपाही
चमू (3 x पृतना): 729 गज + 729 रथ + 2187 घोड़े + 3645 पैदल सिपाही
अनीकिनी (3 x चमू): 2187 गज + 2187 रथ + 6561 घोड़े + 10935 पैदल सिपाही
अक्षौहिणी (10 x अनीकिनी): 21870 गज + 21870 रथ + 65610 घोड़े + 109350 पैदल सिपाही
इस प्रकार एक अक्षौहिणी सेना में गज, रथ, घुड़सवार तथा सिपाही की सेना निम्नलिखित होती थी:
गज: 21870
रथ: 21870
घुड़सवार: 65610
पैदल सिपाही: 109350
इसमें चारों अंगों के 218700 सैनिक बराबर-बराबर बंटे हुए होते थे। प्रत्येक इकाई का एक प्रमुख होता था.
पत्ती, सेनामुख, गुल्म तथा गण के नायक अर्धरथी हुआ करते थे.
वाहिनी, पृतना, चमु और अनीकिनी के नायक रथी हुआ करते थे।
एक अक्षौहिणी सेना का नायक अतिरथी होता था.
एक से अधिक अक्षौहिणी सेना का नायक सामान्यतः एक महारथी हुआ करता था.
पांडवों के पास (7 अक्षौहिणी सेना):
153090 रथ
153090 गज
459270 अश्व
765270 पैदल सैनिक
कौरवों के पास (11 अक्षौहिणी सेना):
240570 रथ
240570 गज
721710 घोड़े
1202850 पैदल सैनिक
इस प्रकार महाभारत की सेना के मनुष्यों की संख्या कम से कम 4681920, घोडों की संख्या (रथ में जुते हुओं को लगा कर) 2715620 और इसी अनुपात में गजों की संख्या थी. इससे आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि महाभारत का युद्ध कितना विनाशकारी था.

अरून शुक्ला
वो कुँए का मैला कुचला पानी पिके भी 100 वर्ष जी लेते थे
हम RO का शुद्ध पानी पीकर 40 वर्ष में बुढे हो रहे है।
वो घाणी का मैला सा तैल खाके बुढ़ापे में भी दौड़~मेहनत कर लेते थे।
हम डबल~ट्रिपल फ़िल्टर तैल खाकर जवानी में भी हाँफ जाते है। 
वो डळे वाला लूण खाके बीमार ना पड़ते थे और हम आयोडीन युक्त खाके हाई~लो बीपी लिये पड़े है।
वो निम~बबूल कोयला नमक से दाँत चमकाते थे और 80 वर्ष तक भी चब्बा~चब्बा कर खाते थे
और हम कॉलगेट सुरक्षा वाले रोज डेंटिस्ट के चक्कर लगाते है ।।
वो नाड़ी पकड़ कर रोग बता देते थे और
आज जाँचे कराने पर भी रोग नहीं जान पाते है।
वो 7~8 बच्चे जन्मने वाली माँ 80 वर्ष की अवस्था में भी घर~खेत का काम करती थी
और आज 1महीने से डॉक्टर की देख~रेख में रहते है फिर भी बच्चे पेट फाड़ कर जन्मते है।।
पहले काळे गुड़ की मिठाइयां ठोक ठोक के खा जाते थे
आजकल तो खाने से पहले ही सुगर की बीमारी हो जाती है।
पहले बुजर्गो के भी गोडे मोढे नहीं दुखते थे और जवान भी घुटनो और कन्धों के दर्द से कहराता है ।
और भी बहुत सी समस्याये है फिर भी लोग इसे विज्ञान का युग कहते है, समझ नहीं आता ये विज्ञान का युग है या अज्ञान का ?????
महावीर वैष्णव
की वाल से साभार।
चीन को अब समझ आ रहा कि .. मोदी ने हमला कब का कर दिया था...

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जिन्हें लग रहा है कि रिलायंस ने ये फ्री फ़ोन अचानक लांच कर दिया उन्हें दोबारा सोचने की ज़रूरत पड़ेगी। मोदी ने 3 साल पहले Make in India लांच किया, विदेश की 70+ मोबाइल कंपनियां भारत आयीं और अपनी फैक्टरियां लगाईं ।
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जिस देश मे मोबाइल का स्क्रीन गार्ड, कवर और ग्लास तक नही बनता था वहां अब मोबाइल बनने शुरू हो गए...। अब इन विदेशी कंपनियों ने भारत मे Made in India हैंडसेट बेचने शुरू कर दिए, जिसमे Xiaomi, Gionee, Oppo, Vivo आदि शामिल हैं।
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लेकिन मोदी का ये सपना नही था, उन्हें तो कुछ और चाहिए था, मोदी को भारत की बादशाहत चाहिए थी विश्व बाजार में, तो जब सब ने अपनी अपनी फैक्ट्री लगा ली प्रोडक्शन चालू कर लिया। तब उन्हें विदेशों में माल बेचने के लिए प्रोत्साहित किया गया, टैक्स में छूट दी गयी, नतीजा ये हुआ कि Xiaomi जैसी कंपनी Made in India हैंडसेट को US और Europe में बेचने लगी, बेच तो पहले भी रही थी पर तब चीन में बना हैंडसेट बेचा जा रहा था और अब भारत मे बना, यानी चीन का व्यापार छीन कर भारत ने ले लिया, और ऐसा एक चीनी कंपनी से करवा लिया, चीन की बौखलाहट की वजह यही है।
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अब कल Jio का फ्री फ़ोन लांच हो गया यानी ऐसी 70+ कंपनियों की वाट लग गयी ,अब वे क्या करेंगी? ज़ाहिर है हजारों करोड़ के इन्वेस्टमेंट के बाद ये कंपनियां बंद तो करेंगी नही क्योंकि बंद करने में पूरा पैसा डूब जाएगा,
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अब इन कंपनियों के लिए भारत का बाजार तो खत्म हो गया ऐसे में अब ये सभी कंपनियां एक्सपोर्ट पर दिमाग लगाएंगी, यानी सभी विदेशी कंपनियां अब मोबाइल बनाएंगी भारत मे और बेचेंगी विदेश में, यही तो मोदी का सपना था, यही सही मायने में Make in India है, जहां भारतीयों को काम मिले, माल भारत मे बने और विदेशों में बेचा जाए।
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वैसे फ्री फ़ोन का कांसेप्ट Jio के साथ लांच होना था पर इसे एक साल तक रोके रखा गया, आप इतने समझदार है कि ये समझने की ज़रूरत नही कि क्यों रोका गया । जो लोग अडानी अम्बानी के लिए हर वक़्त गालिया देते है, वो सबसे पहले लाइन में लगे है .. मुफ्त के मोबाइल के लिए .. !!

Hardik Savani

Sunday, 23 July 2017


3 ऐसे भक्त, जिनके शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका

कबीरदास (1398-1518)— 1518 में कबीर ने काशी के पास मगहर में देह त्याग दी। मृत्यु के बाद उनके शव को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। हिन्दू कहते थे कि उनका अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से होना चाहिए और मुस्लिम कहते थे कि मुस्लिम रीति से। इसी विवाद के चलते जब उनके शव पर से चादर हट गई, तब लोगों ने वहाँ फूलों का ढेर पड़ा देखा। बाद में वहाँ से आधे फूल हिन्दुओं ने ले लिए और आधे मुसलमानों ने। मुसलमानों ने मुस्लिम रीति से और हिंदुओं ने हिंदू रीति से उन फूलों का अंतिम संस्कार किया। मगहर में कबीर की समाधि है।

चैतन्य महाप्रभु (1486-1534)— 15 जून, 1534 को रथयात्रा के दिन जगन्नाथपुरी में संकीर्तन करते हुए
वह जगन्नाथ जी में लीन हो गए और शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका I

मीराबाई (1498-1547)— मीराबाई बहुत दिनों तक वृन्दावन में रहीं और जीवन के अंतिम दिनों में द्वारका चली गईं। जहाँ 1547 ई. में वह नाचते-नाचते
श्री रणछोड़राय जी के मन्दिर के गर्भग्रह में प्रवेश कर गईं और मन्दिर के कपाट बन्द हो गये। जब द्वार खोले गये तो देखा कि मीरा वहाँ नहीं थी। उनका चीर मूर्ति के चारों ओर लिपट गया था और मूर्ति अत्यन्त प्रकाशित हो रही थी। मीरा मूर्ति में ही समा गयी थीं। मीराबाई का शरीर भी कहीं नहीं मिला।....

हरि हरि बोल
1 जुलाई 
 


रसूल का घरेलू व्यभिचार!
विश्व में भारतीय संस्कृति और परम्परा को महान माना जाता है .क्योंकि इस में स्त्रियों को देवी की तरह सम्मान दिया जाता है .यहाँ तक मौसी , बुआ चचेरी बहिन और पुत्र वधु पर सपने में भी बुरी दृष्टि रखने को महापाप और अपराध माना गया है . लेकिन इन्हीं कारणों से कोई भी समझदार व्यक्ति इसलाम को धर्म कभी नहीं मानेगा , क्योंकि मुहम्मद अपनी वासना पूर्ति के लिए कुरान का सहारा लेकर ऎसी ही स्त्रियों से सहवास करने को वैध बना देते थे , जिसका पालन मुसलमान आज भी कर रहे हैं .इस विषय को स्पष्ट करने के लिये कुरान की उन आयतों , हदीसों और उनकी ऐतिहासिक प्रष्ट भूमि को देखना होगा , कि मुहम्मद ने अपनी सगी मौसी , चचेरी बहिन और अपने दत्तक पुत्र की पत्नी से सहवास कैसे किया था . और इस पाप को कुरान की आयत बना कर कैसे जायज बना दिया .

इस्लामी परिभाषा में अपने शहर को छोड़ कर पलायन करने को हिजरत (Migration ) कहा जाता है . लगभग सन 622 में मुहम्मद को मक्का छोड़ कर मदीना जाना पडा था .उनके साथ कुछ पुरुष और महिलायें भी थी . साथ में उनकी प्रिय पत्नी आयशा भी थी . इसी घटना की प्रष्ट भूमि में कुरआन की सूरा अहजाब की वह आयतें दी गयी हैं जिनमे मौसी, चचेरी बहिन , और पुत्रवधु से शादी करना या उनसे सम्भोग करने को जायज ठहरा दिया गया है .ऐसी तीन औरतों के बारे में इस लेख में जानकारी दी जा रही है , जिन से मुहम्मद ने कुरान की आड़ में अपनी हवस पूरी की थी .

1.मौसी के साथ कुकर्म
मुहम्मद की हवस की शिकार होने वाली पहली औरत का नाम " खौला बिन्त हकीम अल सलमिया خولة بنت حكيم السلمية " था . और उसके पति का नाम "उसमान बिन मजऊम عثمان بن مظعون‎ " था . खौला मुहम्मद साहब की माँ की बहिन यानि उनकी सगी मौसी ( maternal aunt ) थी . इसको मुहम्मद ने अपना सहाबी बना दिया था . मदीना की हिजरत में मुहम्मद आयशा के साथ खौला को भी ले गए थे .यह घटना उसी समय की है इस औरत ने अय्याशी के लिए खुद को मुहम्मद के हवाले कर दिया था .यह बात मुसनद अहमद में इस प्रकार दी गयी है .
"खौला बिन्त हकीम ने रसूल से पूछा कि जिस औरत को सपने में ही स्खलन होने की बीमारी हो , तो वह औरत क्या करे , रसूल ने कहा उसे मेरे पास लेटना चाहिए "
"Khaula Bint Hakim al-Salmiya,asked the prophet about the woman having a wet dream, he said she should lay with me "

محمد بن جعفر قال حدثنا شعبة وحجاج قال حدثني شعبة قال سمعت عطاء الخراساني يحدث عن‫حدثنا """‬ ‫سعيد بن المسيب أن خولة بنت حكيم السلمية وهي إحدى خال ت النبي صلى ال عليه وسلم سألت النبي صلى ال‬ ‫عليه وسلم عن المرأة تحتلم فقال رسول ال صلى ال عليه وسلم لتغتسل‬Translation:26768 -

Musnad Ahmad (‫مسند أدحمد‬ )hadith 26768

तब खौला मुहम्मद साहब के पास सो गयी , और मुहम्मद साहब ने उसके साथ सम्भोग किया .

2.आयेशा ने खौला को धिक्कारा
जब आयशा को पता चला कि रसूल चुपचाप खौला के साथ सम्भोग कर रहे हैं तो उसने खौला को धिक्कारा और उसकी बेशर्मी के लिए फटकारा यह बात इस हदीस में दी गयी है ,
"हिशाम के पिता ने कहा कि खौला एक ऎसी औरत थी जिसने सम्भोग के लिए खुद को रसूल के सामने प्रस्तुत कर दिया था .इसलिए आयशा ने उस से पूछा ,क्या तुझे एक पराये मर्द के सामने खुद को पेश करने में शर्म नही आयी ? तब रसूल ने कुरान की सूरा अहजाब 33:50 की यह आयत सुना दी , जिसमे कहा था " हे नबी तुम सम्भोग के लिए अपनी पत्नियों की बारी ( Turn ) को टाल सकते हो .इस पर आयशा बोली लगता है तुम्हारा अल्लाह तुम्हें और अधिक मजे करने की इजाजत दे रहा है ."( I see, but, that your Lord hurries in pleasing you)
"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلاَمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَتْ خَوْلَةُ بِنْتُ حَكِيمٍ مِنَ اللاَّئِي وَهَبْنَ أَنْفُسَهُنَّ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ عَائِشَةُ أَمَا تَسْتَحِي الْمَرْأَةُ أَنْ تَهَبَ نَفْسَهَا لِلرَّجُلِ
لِلرَّجُلِ فَلَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏تُرْجِئُ مَنْ تَشَاءُ مِنْهُنَّ‏}‏ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أَرَى رَبَّكَ إِلاَّ يُسَارِعُ فِي هَوَاكَ‏.‏ رَوَاهُ أَبُو سَعِيدٍ الْمُؤَدِّبُ وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ وَعَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ يَزِيدُ بَعْضُهُمْ عَلَى بَعْضٍ‏.‏

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 48

3.आयेशा को ईर्ष्या हुई

कोई भी महिला अपने पति की दूसरी महिला से अय्याशी को सहन नहीं करेगी . आयशा ने रसूल से कहा कि मुझे इस औरत से ईर्ष्या हो रही है . यह बात इस हदीस में इस प्रकार दी गयी है
"आयशा ने कहा कि मैं रसूल से कहा मुझे उस औरत से जलन हो रही है जिसने सम्भोग के लिए खुद को तुम्हारे हवाले कर दिया . क्या एसा करना गुनाह नहीं है . तब रसूल ने सूरा अहजाब की 33:50 आयत सुना कर कहा इसमे कोई पाप नहीं है ,क्योंकि यह अल्लाह का आदेश है . तब आयशा ने कहा लगता है , तुम्हारे अल्लाह को तुम्हें खुश करने की बड़ी जल्दी है "(It seems to me that your Lord hastens to satisfy your desire. )

सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3453

4.चचेरी बहिन से सहवास
मुहम्मद साहब के चाचा अबू तालिब की बड़ी लड़की का नाम "उम्मे हानी बिन्त अबू तालिब - أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ " था .जिसे लोग "फकीतः और " हिन्दा " भी कहते थे .यह सन 630 ईसवी यानि 8 हिजरी की बात है . जब मुहम्मद साहब तायफ़ की लड़ाई में हार कर साथियों के साथ जान बचाने के लिए काबा में छुपे थे .लकिन मुहम्मद साहब चुपचाप सबकी नजरें चुरा कर उम्मे हानी के घर में घुस गए ,लोगों ने उनको काबा में बहुत खोजा .और आखिर वह उम्मे हानी के घर में पकडे गए .इस बात को छुपाने के लिए मुहम्मद साहब ने एक कहानी गढ़ दी और लोगों से कहा कि मैं यरुशलेम और जन्नत की सैर करने गया था .मुझे अल्लाह ने बुलवाया था .उस समय उनकी पहली पत्नी खदीजा की मौत हो चुकी थी वास्तव में .मुहम्मद साहब उम्मे हानी के साथ व्यभिचार करने गए थे .उन्होंने कुरान की सुरा अहजाब की आयत 33:50 सुना कर सहवास के लिए पटा लिया था .यह बात हदीस की किताब तिरमिजी में मौजूद है . जिसे प्रमाणिक माना जाता है . पूरी हदीस इस प्रकार है ,

"उम्मे हानी ने बताया उस रात रसूल ने मुझ से अपने साथ शादी करने का प्रस्ताव रखा , लेकिन मैं इसके लिये उन से माफी मागी . तब उन्होंने कहा कि अभी अभी अल्लाह की तरफ से मुझे एक आदेश मिला है ".हे नबी हमने तुम्हारे लिए वह पत्नियां वैध कर दी हैं ,जिनके मेहर तुमने दे दिये .और लौंडियाँ जो युद्ध में प्राप्त हो ,और चाचा की बेटीयाँ , फ़ूफ़ियों की बेटियाँ ,मामू की बेटियाँ,खालाओं की बेटियाँ और जिस औरत ने तुम्हारे साथ हिजरत की है ,और वह ईमान वाली औरत जो खुद को तुम्हारे लिए समर्पित हो जाये " यह सुन कर मैं राजी हो गयी और मुसलमान बन गयी "

" عَنْ أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ، قَالَتْ خَطَبَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاعْتَذَرْتُ إِلَيْهِ فَعَذَرَنِي ثُمَّ أَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى ‏:‏ ‏(‏إنَّا أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَاجَكَ اللاَّتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالاَتِكَ اللاَّتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ ‏)‏ الآيَةَ قَالَتْ فَلَمْ أَكُنْ أَحِلُّ لَهُ لأَنِّي لَمْ أُهَاجِرْ كُنْتُ مِنَ الطُّلَقَاءِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ السُّدِّيِّ ‏.‏ "-هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ -

तिरमिजी -जिल्द 1किताब 44 हदीस 3214 पे.522

5.पुत्रवधु से सहवास

मुहम्मद साहब के समय अरब में दासप्रथा प्रचलित थी .लोग युद्ध में पुरुषों , औरतों , और बच्चों को पकड़ लेते थे .और उनको बेच देते थे .ऐसा ही एक लड़का मुहम्मद साहब ने खरीदा था . जिसका नाम " जैद बिन हारिस - زيد بن حارثة‎ " था .(c. 581-629 CE) मुहम्मद साहब ने उसे आजाद करके अपना दत्तक पुत्र बना लिया था अरबी में . दत्तक पुत्र (adopt son ) को " मुतबन्ना " कहा जाता है . यह एक मात्र व्यक्ति है जिसका नाम कुरान सूरा अह्जाब 33:37 में मौजूद है .इसी लिए लोग जैद को " जैद मौला "या " जैद बिन मुहम्मद भी कहते थे .यह बात इस हदीस से साबित होती है ,

""حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مَا كُنَّا نَدْعُو زَيْدَ بْنَ حَارِثَةَ إِلاَّ زَيْدَ بْنَ مُحَمَّدٍ حَتَّى نَزَلَتْ ‏:‏ ‏(‏ ادعُوهُمْ لآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ ‏)‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏ "

तिरमिजी -जिल्द 1 किताब 46 हदीस 3814

कुछ समय के बाद् जैद की शादी हो गयी उसकी पत्नी का नाम "जैनब बिन्त जहश - زينب بنت جحش‎ " था वह काफी सुन्दर और गोरी थी . इसलिये मुहम्मद साहब की नजर खराब हो गयी .उन्होंने घोषित कर दिया कि आज से मेरे दत्तक पुत्र को मेरे नाम से नहीं उसके असली बाप के नाम से पुकारा जाय .और इसकी पुष्टि के लिये कुरान की सूरा 33:5 भी ठोक दी .यह बात इस हदीस से सबित होती है ,

6-रसूल की नीयत में पाप

जैनब को हासिल करने के लिए मुहम्मद साहब ने फिर कुरान का दुरुपयोग किया .और लोगों से जैद को मुहम्मद का बेटा कहने से मना कर दिया , ताकि लोग जैनब को उनके लडके की पत्नी नहीं मानें .
" जैनब कुरैश कबीले की सब से सुंदर लड़की थी .और जब अल्लाह ने अपनी किताब में जैद के बार में सूरा 33 की आयत 5 नाजिल कर दी , जिसमे कहा था कि आज से तुम लोग जैद को उसके असली बाप के नाम से पुकारा करो .,क्योंकि अल्लाह की नजर में यह बात तर्कसंगत प्रतीत लगती है .और यदि तुम्हें किसी के बाप का नाम नहीं पता हो ,तो उस व्यक्ति को भाई कह कर पुकारा करो ,

मलिक मुवत्ता -किताब 30 हदीस 212

7-कुरान की सूरा 33:5 की व्याख्या

कुरान की सूरा अहजाब की आयत 5 के अनुसार दत्तक पुत्र जैद को असली पुत्र का दर्जा नहीं दिया गया , इस आयत की व्याख्या यानी तफ़सीर "जलालुद्दीन सुयूती - جلال الدين السيوطي‎ " ने की है . इनका काल c. 1445–1505 AD है .इन्होने कुरान की जो तफ़सीर की है ,उसका नाम " तफ़सीर जलालैन -تفسير الجلالين " है .इसमे बताया गया है कि रसूल ने जैद को अपने पुत्र का दर्जा नहीं देने के लिए यह तर्क दिए थे ,1 .दत्तक पुत्र रखने की परंपरा अज्ञान काल है , अब इसकी कोई जरुरत नहीं है .2 . मैंने जिस समय जैद को खरीदा था ,उस समय अल्लाह ने मुझे रसूल नही बनाया था .3. लोग जैद को मेरा सगा बेटा मान लेते थे . जिस से मेरी बदनामी होती थी .4. जैद ने मुझ से जैनब को तलाक देने का वादा कर रखा है .

{ وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِيۤ أَنعَمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَٱتَّقِ ٱللَّهَ وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا ٱللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى ٱلنَّاسَ وَٱللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَاهُ فَلَمَّا قَضَىٰ زَيْدٌ مِّنْهَا وَطَراً زَوَّجْنَاكَهَا لِكَيْ لاَ يَكُونَ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ حَرَجٌ فِيۤ أَزْوَاجِ أَدْعِيَآئِهِمْ إِذَا قَضَوْاْ مِنْهُنَّ وَطَراً وَكَانَ أَمْرُ ٱللَّهِ مَفْعُولاً }

Tafsir al-Jalalayn - (تفسير الجلالين )Sura -ahzab 33:5

इन्हीं कुतर्कों के आधार पर लगभग सन625 ईसवी में मुहम्मद साहब ने अपने दत्तक पुत्र जैद की पत्नी से शादी कर डाली .यानी जैनब के साथ व्यभिचार किया .
देखिये विडिओ -Prophet Muhammad lusts after & steals his adopted son's wife Pt. 2

http://www.youtube.com/watch?v=wp3pMgmGuVo

अपने निकट सम्बन्ध की स्त्रियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने को इनसेस्ट (incest ) कहा जाता है , विश्व के सभी धर्मों और हर देश के कानून में इसे पाप और अपराध माना गया है . लेकिन मुहम्मद साहब अपनी वासना पूर्ति के लिए तुरंत कुरान की आयत सूना देते थे . और इस निंदनीय काम को जायज बना देते थे .कुरान की इसी तालीम के कारण हर जगह व्यभिचार और बलात्कार हो रहे हैं .क्योंकि मुसलमान इन नीच कर्मों को गुनाह नहीं मानते ,बल्कि रसूल की सुन्नत मानते हैं .
Vithal Vyas
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मुसलमान मोहम्मद के चरित्र चित्रण से क्यों डरते हैं?
मोहम्मद का कार्टून बना तो पूरी दुनिया के मुसलमानों ने अपनी-२ जगहों पर बलवा किया | दुनिया को इतिनी बुरी तरह से बदलने वाला व्यक्ति रहस्य बना हुआ हैं | कोई कुछ जानता ही नहीं उसके बारे में | प्रश्न तो ये उठता हैं के इसाई ईशा मसीह के नाटक मंच पर दोहराते हैं ताकि उनके अच्छे गुण अन्य लोग जान सके और ले सके | हिंदू राम लीला रचाते हैं ताकि राम के अच्छे कृत्यों को दिमाग में रख सके | अच्छाई की बुराई पर जीत | पर मोहम्मद के नाम पर ऐसा क्या की उनका कोई चित्र नहीं हो सकता | मुस्लिम कहते हैं इस्लाम में बुत परस्ती मना हैं इसलिए | बुत परस्ती मना होने से चित्रण का क्या लेना देना ? क्या काबा मंदिर (उनके लिये मस्जिद) की तस्वीर रखना नहीं गलत हैं पर रखते हैं | तस्वीर रखने से उसकी बुत परस्ती थोड़े हो जाती हैं बल्कि अपने आदर्श के कृत्यों की याद बनी रहती हैं | जैसे आर्य समाजी ऋषि दयानंद की तस्वीर रखते हैं | दूसरा तर्क ये दे सकते के इस से उनका अपमान होगा | मान-अपमान तो जीवित लोगो का होता हैं अगर ये भेद नहीं पता उन्हें तो बुत परस्ती भी नहीं पता | इसी लिए वे हजरे अस्वाद को सरक्षित करे हुए हैं और बुत परस्ती के विरोध में होने का ढोंग करते हैं |

वास्तविक बात तो ये हैं के मोहम्मद का कोई चरित्र ही नहीं था जिसका चित्रण किया जाए | क्या दिखाएंगे मुसलमान की कैसे मोहम्मद के दादा अबू मत्लिब काबा मंदिर का सरक्षण करते थे तीर्थ यात्रियों का प्रबंध करते थे | किस प्रकार मोहम्मद को बचपन में मिर्गी के दौरे पड़ते थे | कैसे उसने अपने से १५ वर्ष आयु में बड़ी और अरब की अमीर बुडिया से शादी की | उस अमीर बुडिया के मरते ही किस प्रकार ५१ वर्षीया मोहम्मद ने ६ वर्ष की बच्ची से शादी(माफ़ी चाहूँगा इस गंदे कृत्य को मुस्लिम शादी कहते हैं) की | किस प्रकार ९ वर्ष की होने पर उस बच्ची से सम्भोग किया | अपनी मू बोले बेटे की बीवी से शादी की और कैसे भिन्न भिन्न ३१ से ऊपर औरते रखी | कैसे मोहम्मद ने उम् किर्फा की वृद्ध नेत्रानी बनू फस्रह के हाथ पावो को २ उटो से बंधवा के फड़वा दिया | ऊट की चोरी करने वाले ८ लोगो के हाथ पाँव कटवा दीये | वो ऊट जो खुद मोहम्मद ने चुराए थे |

बनू कुइनैका, बनू नादिर, बनू कुरैज़ा के लोगो पर कितने अमानुषी अत्याचार किये | दूनिया का सबसे पहला इस्लामी आतंकवादी मोहम्मद ही तो था जो ये सब देखने पर सब समझ जाएगा | जो मोहम्मद को बचपन से जानता था उसका चाचा जिसने ना जाने कितनी बार उसकी जान बचाई पर मरते दम तक कभी कुरैशो का मजहब नहीं छोड़ा और इस्लाम नहीं स्वीकार क्यों की उसे पता था के उसका भतीजा पागल हैं | खुद आयशा ने हफ्सा के साथ मिल कर मोहम्मद को जेहर दे दिया कहते हैं मोहम्मद फिर एक बच्ची से शादी की योजना बना रहा था | फिर लाभ तो आयेशा के बाप अबू बक्र को मिला पहला खलीफा वही हुआ | पर बचा कोई नहीं खानदान में दिया जलने वाला कोई नहीं रहा | आयेशा बुरी तरह क़त्ल कर दी गई | जिसने कुरान लिखी उसे खुद मोहम्मद ने मरवा दिया | खैर इतना शैतानियत जो भी लिखेगा मरेगा तो हैं ही | पूरी दुनिया आज इस्लामीकरण के खतरे के तले डगमगा रही हैं, बेकसूर मारे जा रहे हैं | इन सब का कारण मोहम्मद था जो कोई भी ये सब देख लेगा उसे समझने में एक पल नहीं लगेगा |

पर मोहम्मद को तो ऐसा हौवा बना रखा हैं के उसके बारे में तो बात करनी ही नहीं | वो इसलिए क्यों की खुद मोहम्मद ने उन सबको बुरी तरह क़त्ल करवा दिया जिसने भी उसके पैगम्बर होने का प्रमाण माँगा | खुद मोहम्मद ने ना जाने कितनी बार अपनी बात से पलटा हैं इसका प्रमाण कुरान की विपरीत बाते हैं | इसी लिए मुसलमान मोहम्मद को छुपा के रखते हैं | मोहम्मद ने ज़न्नत में खुद की सिफारिश का पेच भी फसा रखा हैं ताकि कोई उसके गलत कामो पर ऊँगली ना उठाए | पर खुद जिनको भी ये बाते पता चलती हैं उनका मानवीय पक्ष इस्लाम छुडवा देता हैं | पर जो वाकई शैतान हैं वो सही जगह हैं क्यों के दुनिया के सारे गलत काम इस्लाम में जायज हैं अगर वो गैर मुसलमान के साथ किये जाए | तो कोई क्यों लूटने, बलात्कार, हत्या, झूठ बोलने की इजाजत छोड़ेगा अगर वह अपराधी परवर्ती का हैं |

एक बात और के मोहम्मद देखने में बदसूरत था हदीसो की माने तो |जिस व्यक्ति ने उसकी तस्वीर बने मोहम्मद ने उसे देश निकाला दे दिया | औरते उस से नफरत करती थी | शायद इसी लिए वो औरतो का बलात्कार करता था | बात दिखने की नहीं हैं बात तो कर्मो की हैं जो इतने गलत थे की उनको छुपा के रखने में ही इस्लाम की भलाई हैं |

5 जुलाई 
 कर्ण की उदारता

एक बार भगवान श्रीकृष्ण पाण्डवों के साथ बातचीत कर रहे थे। भगवान उस समय कर्ण की उदारता की बार-बार प्रशंसा कर रहे थे। यह बात अर्जुन को अच्छी नहीं लगी। 

अर्जुन ने कहा – श्यामसुन्दर! हमारे बड़े भाई धर्मराज जी से बढ़कर उदार तो कोई है ही नहीं, फिर आप उनके सामने कर्ण की इतनी प्रशंसा क्यों करते हैं?

भगवान ने कहा – ये बात मैं तुम्हें फिर कभी समझा दूँगा।

कुछ दिनों के बाद अर्जुन को साथ लेकर भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर के राजभवन के दरवाजे पर ब्राह्मण का वेश बनाकर पहुँचे।

उन्होंने धर्मराज से कहा – हमको एक मन चन्दन की सूखी लकड़ी चाहिये। आप कृपा करके मँगा दें।

उस दिन जोर की वर्षा हो रही थी। कहीं से भी लकड़ी लाने पर वह अवश्य भीग जाती। महाराज युधिष्ठिर ने नगर में अपने सेवक भेजे, किन्तु संयोग की बात ऐसी कि कहीं भी चन्दन की सूखी लकड़ी सेर-आध-सेर से अधिक नहीं मिली।

युधिष्ठिर ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की – आज सूखा चन्दन मिल नहीं रहा है। आप लोग कोई और वस्तु चाहें तो तुरन्त दी जा सकती है।

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा – सूखा चन्दन नहीं मिलता तो न सही। हमें कुछ और नहीं चाहिये।

वहाँ से अर्जुन को साथ लिये उसी ब्राह्मण के वेश में भगवान श्रीकृष्ण कर्ण के यहाँ पहुँचे। कर्ण ने बड़ी श्रद्धा से उनका स्वागत किया।

भगवान ने कहा – हमें इसी समय एक मन सूखी लकड़ी चाहिये।

कर्ण ने दोनों ब्राह्मणों को आसन पर बैठाकर उनकी पूजा की। फिर धनुष चढ़ाकर उन्होंने बाण उठाया। बाण मार-मारकर कर्ण ने अपने सुन्दर महल के मूल्यवान किवाड़, चौखटें, पलंग आदि तोड़ डाले और लकड़ियों का ढेर लगा दिया। सब लकड़ियाँ चन्दन की थीं।

यह देखकर श्रीकृष्ण ने कर्ण से कहा – तुमने सूखी लकड़ियों के लिये इतनी मूल्यवान वस्तुऍ क्यों नष्ट की ?

कर्ण हाथ जोड़कर बोले – इस समय वर्षा हो रही है। बाहर से लकड़ी मँगाने में देर होगी। आप लोगों को रुकना पड़ेता। लकड़ी भीग भी जाती। ये सब वस्तुएँ तो फिर बन जायेगीं किन्तु मेरे यहाँ आये अतिथि को निराश होना पड़े या कष्ट हो तो वह दुःख मेरे हृदय से कभी दूर नहीं होगा।

भगवान श्रीकृष्ण ने कर्ण को यशस्वी होने का आशीर्वाद दिया और वहाँ से अर्जुन के साथ चले आये।

लौटकर भगवान ने अर्जुन से कहा – अर्जुन! देखो, धर्मराज युधिष्ठिर के भवन के द्वार, चौखटे भी चन्दन के हैं। चन्दन की दूसरी वस्तुएँ भी राजभवन में है। और पांडव उन्हें देने में कृपण भी नहीं हैं लेकिन चन्दन की लकड़ी माँगने पर भी उन वस्तुओं को देने की याद धर्मराज को नहीं आयी। पर भी कर्ण ने अपने घर की मूल्यवान वस्तुएँ तोड़कर लकड़ी दे दी। दान-धर्म में जिसके प्राण बसते हैं उसी को समय पर याद आता है कि वस्तु कैसे देनी है।
कर्ण स्वभाव से उदार हैं और धर्मराज युधिष्ठिर विचार करके धर्म पर स्थिर रहते हैं। मैं इसी से कर्ण की प्रशंसा करता हूँ।

सीख 👉 इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि परोपकार, उदारता, त्याग तथा अच्छे कर्म करने का स्वभाव बना लेना चाहिये। जो लोग नित्य अच्छे कर्म नहीं करते और सोचते हैं कि कोई बड़ा अवसर पर महान कार्य करेंगे उनको अवसर आने पर भी सूझता ही नहीं। और जो छोटे-छोटे अवसरों पर भी त्याग तथा उपकार करने का स्वभाव बना लेता है, वही महान कार्य करने में भी सफल होता है।

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मेवाड़ की वीरांगना पन्नाधाय के बलिदान की अमर कथा
👍👍👍👍👍 विट्ठलव्यास 👍👍👍👍👍
मेवाड़ के सिंहासन पर विराजमान विक्रमादित्य ढीठ और अभिमानी राजा था। विभिन्न प्रसिद्ध व्यक्तियों ने उसके राज्य को छोड़ना आरम्भ कर दिया था। रानी कर्णावती, विक्रमादित्य के भय से अपने पुत्र उदय को पालन पोषण के लिए पन्ना धाय के पास छोड़ दिया जिससे वो अपने छोटे शिशु के साथ उदय की देखभाल कर सके।
महाराजा राणा सांगा का देहान्त हुआ तब उनके पु्त्र उदयसिंह बहुत छोटे थे, बनवीर को सोंपा गया था काम नन्हें उदयसिंह की रक्षा व लालन पालन करके बडा करने का और समुचित शिक्षा दिलवाने का पर बनवीर के मन में कुछ ‌और ही चल रहा था। उसनें नन्हें बालक उदयस
पन्ना धाय उस समय नन्हें राजकुमार उदयसिंह की धाय मां थी और उनके लालन पालन में व्यस्त थी | साथ ही पन्ना धाय एक बहुत ही स्वाभिमानी, देशभक्त और राणा का एहसान मानने वाली महिला थी | पन्ना धाय का भी एक पुत्र था जो लगभग उम्र में उदयसिंह के जितना ही था।
जब पन्ना को बनवीर के गंदे नापाक इरादों का पता चला तो उसने नन्हें बालक उदयसिंह की जगह अपने पुत्र को सुला दिया तभी बनवीर नें नंगी तलवार लिये कक्ष में प्रवेश किया और पन्नाधाय से पूछा की कहां है उदयसिंह तो पन्ना धाय नें सिर्फ इशारा किया और तत्काल बनवीर नें पन्ना के पुत्र को मौत के घाट उतार दिया, वह समझ रहा था की मेनें मेवाड के होने वाले राजा उदयसिंह को मार डाला है पर हकीहत में पन्ना धाय नें अपने पुत्र की कुर्बानी दे दी थी और मेवाड राजवंश के चिराग को बचा लिया था।
एक गुप्त रास्ते से पन्नाधाय नें बालक उदयसिंह को झूठे पत्तल से भरे टोकरे में रखवाकर किसी विश्वासपात्र के हाथों महल से बाहर सुरक्षित जगह पहुंचा दिया | कोई महिला या नारी अपने राजा के पु्त्र की रक्षा करने के लिये इतना बडा बलिदान करे ये बहुत बडी बात है और पन्नाधाय एक बहुत बडा उदाहरण है नारी शक्ति के त्याग और बलिदान का | पन्ना नें अपने पुत्र का बलिदान करते हुए राणा के पु्त्र के जीवन को बचा लिया था और आज भी वह अपने इस अनोखे बलिदान के लिये जानी जाती है | पन्ना धाय अमर है |



🌺विट्ठलव्यास 🌺

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जिनका भी बहिष्कार हुआ उनके कुकर्मों के कारण हुआ ...
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आज तक भारत के हजारों वर्षों के इतिहास मर एक भी व्यक्ति का जातिगत शोषण नहीं हुआ; एक भी व्यक्ति का बहिष्कार जातिगत आधार पर नहीं हुआ; जिनका भी बहिष्कार हुआ उनके कुकर्मों के कारण हुआ फिर वे हिन्दू समाज के लिए वैसे ही हो गए जैसे कि आज अमेरिका के लिए नॉर्थ कोरिया।
वर्तमान समय मे बना हुआ जातिगत आरक्षण तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक इन काल्पनिक शोषण की कहानियों का झूठ सामने नहीं लाया जाता। शोषण की कहानियां उसी तर्ज पर बनीं है जैसे कि आर्यन-द्रविड़ियन और कांग्रेस द्वारा बनाई भगवा आतंकवाद की कहानियां...
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राजस्थान के दलितों में एक जाति होती है "बेड़िया". इनका पुश्तैनी काम होता है अपने परिवार की महिलाओं से वेश्यावृत्ति करवाना।
अब आप सोच रहे होंगे कि मैं भांग खा के यह पोस्ट लिख रहा हूँ पर इसकी सत्यता आप इस पर गूगल करके जान सकतें हैं, कई लिंक मिलेंगे; बेड़िया लोगों की पुश्तैनी वेश्यावृत्ति पर यू ट्यूब पर वीडियो और दूरदर्शन की डाक्यूमेंट्री भी देख सकतें हैं।
अगर आप बेड़ियों के इलाके में शाम के समय जाएं तो आपको नुक्कड़ या फुटपाथ पर अकेले खड़े हुए बेड़िया दलित मिल जाएंगे जो अपनी बहन, पत्नी या बेटी के लिए रात का ग्राहक तलाश रहे होतें हैं। बेड़िये, अपनी लड़कियों को अच्छे से खिला पिला कर रखतें है क्योंकि लड़की जितनी भरी-भरी, गदरायी होगी; उसका मार्केट में रेट और अच्छा मिलेगा।
बेड़िया लड़कियां वेश्यावृत्ति अपनी माँ से सीखतीं है, उनकी माँ अपनी नानी से और ये क्रम सैकड़ों सालों से चलता आ रहा है। बेड़िया समाज से हिंदुओं की कोई जाति रोटी-बेटी का संबंध नहीं रखती, यहाँ तक कि असमानता का रोना रोने वाली दलितों की बाहुबली जातियाँ मीणा, जाटव, चमार, पासी इत्यादि जातियाँ भी अपनी बेटी बेड़ियों को देने में घबरातीं है क्योंकि इन्हें पता है इनकी बेटी को अगले दिन से कोठे पर बिठा दिया जाएगा और उसके बेड़िया पति, ससुर और देवर बाजार में उसका रेट लगाने लगेंगे।
बेड़ियों की इन्ही हरकतों के कारण ये हिन्दू समाज से बहिष्कृत रहे, पर अम्बेडकर ने इन्हें मनुस्मृति द्वारा अछूत बनाना प्रचारित किया।
बहिष्कृत जातियों की बात सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में एक दलित जाति है "बावरिया". यह ब्रिटिश सरकार के समय से आपराधिक जाति (criminal tribe) है। यह जाति अपहरण, हत्या, चोरी, डकैती, लूटपाट, बलात्कार आदि जैसी घटनाओं के लिए कुख्यात है।
लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर यह जाति अभी लूटपाट भी कर रही है। ये सड़कों कर कीलें बिछा देतें है; उसके बाद कोई बस या कार पंचर टायर की वजह से आगे जा के रूकती है तो यात्रियों को बंधक बना के लूटते हैं और महिलाओं, लड़कियों के साथ बलात्कार करतें है। किसी पुरुष ने रोकना चाहा तो उसकी हत्या कर देतें है। बहुचर्चित बुलंदशहर गैंग रेप भी बावरिया गिरोह के दलितों ने किया था जिसमे एक महिला और 14 वर्ष की बेटी का गैंगरेप किया था। अगर आप कभी भी लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर अपनी कार से जाएं तो सुनिश्चित कीजिये कि कार की टंकी में पेट्रोल फुल है और कार अच्छी कंडीशन में हैं। क्योंकि आपकी कार यदि हाईवे पर रोक गई तो फिर आपके साँसों की डोर बावरिया गिरोह के भीमटों के हाथ मे होगी।
बावरिया, अपनी आपराधिक प्रवृत्ति कर कारण वर्तमान समय मे भी बहिष्कृत जाति है।
अब महाराष्ट्र आतें है। देश में सबसे महत्वपूर्ण बहिष्कार यदि किसी जाति का हुआ है तो वे महाराष्ट्र के महार लोग हैं, माने अम्बेडकर की जाति। रोचक बात ये है कि न तो ये जाति बावरिया की तरह लूटपाट करती थी, न ही बावरिया की तरह वेश्यावृत्ति, फिर भी बुरी तरह बहिष्कृत हुए। महार एक सवर्ण क्षत्रिय जाति हुआ करती थी। महारों के हाथ मे चौकीदारी, राज्य के महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा, काफिलों और खजाने का जिम्मा महारों के पास होता था। महारों की समाज मे बहुत इज़्ज़त थी। जब कभी दो लोगों के बीच भूमि विवाद होता था तो इसे सुलझाने के लिए महार आते थे और इनकी कही बात अंतिम होती थी। महारों के लिए परिस्थितियां तब बदल गईं जब इन्होंने जमीन के लालच में अंग्रेजी सेना के साथ मिल कर 1 जनवरी 1818 को पुणे के कोरेगांव में 28,000 पेशवा सैनिकों को मार दिया। आज भी पुणे में भीमा कोरेगांव की मीनार, महारों के देशद्रोह और अपराध की गवाही दे रही है। इसके युद्ध के लिए महारों में कोई पछतावा नही बल्कि आज भी हर बरस 1 जनवरी को कई महार वहां उसी युद्ध के लिए शौर्य दिवस मनाने के लिए इकट्ठा होतें हैं।
इस युद्ध के बाद महारों को सभी मराठी लोगों ने बहिष्कृत कर दिया। दूध वाले ने दूध देने बंद, पुजारी ने मंदिर में घुसना बंद, अध्यापकों ने इन्हें शिक्षा देना बंद कर दिया, कुएं से पानी भरना बंद कर दिया।
तत्कालीन ईसाई मिशनरी John Muir, जो संस्कृत का विद्वान भी था, उसने महारों के साथ मिल कर मनु स्मृति को एडिट किया और इतिहास बना कर ये प्रचारित किया गया कि महारों का बहिष्कार मनु स्मृति द्वारा हुआ है।
1920 में अम्बेडकर ने महारों के भीमा कोरेगांव युद्ध में बात छुपाई और अपनी जाति के बहिष्कार का आरोप ब्राह्मणों पर लगा के ब्राह्मण विरोध (Anti Brahminism) को संस्थागत रूप दिया और इसके बात दलित आंदोलन ने राजनैतिक रूप लिया। ये वे बातें हैं जो इतिहास के पन्नों से मिटा दीं गईं हैं। हिन्दू संगठन भी भाईचारे के चक्कर इन सब बातों को उजागर नहीं करते।
आज तक भारत के हजारों वर्षों के इतिहास मर एक भी व्यक्ति का जातिगत शोषण नहीं हुआ; एक भी व्यक्ति का बहिष्कार जातिगत आधार पर नहीं हुआ; जिनका भी बहिष्कार हुआ उनके कुकर्मों के कारण हुआ फिर वे हिन्दू समाज के लिए वैसे ही हो गए जैसे कि आज अमेरिका के लिए नॉर्थ कोरिया।
वर्तमान समय मे बना हुआ जातिगत आरक्षण तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक इन काल्पनिक शोषण की कहानियों का झूठ सामने नहीं लाया जाता। शोषण की कहानियां उसी तर्ज पर बनीं है जैसे कि आर्यन-द्रविड़ियन और कांग्रेस द्वारा बनाई भगवा आतंकवाद की कहानियां।
कलम उठाइये और झूठे इतिहास को बदल दीजिये..!!
15 जुलाई 
 


मैं जानता हूँ, भाजपा को और कट्टर बनने की जरूरत है
 लेकिन हिन्दू ही मूर्ख है। क्या किया जाय ..?

जब भी मैं मुल्लों की असलियत बताने वाला पोस्ट डालता हूँ तो कई गधे हिन्दू कमेंट करते हैं “क्या कलाम साहब मुस्लिम नहीं हैं”.....अबे ढक्कन हिंदुओं ....बंगाल में क्यों नहीं ,कोई कलाम जा कर हिंदुओं को बचाता ..?

जिस कलाम की बात करते हो उसे खुद 100% मुल्ले ही मुसलमान नहीं मानते। कलाम ने कुरान पढ़ी ही नहीं ...जितनी पढ़ी उसे माना हि नही ...इसलिये उन्हे मुसलमान नही माना जा सकता... वह तो महामानव था जो गलती से इस्लाम मे पेदा हुआ
 भाजपा 
इसीलिए कट्टर हिंदुओं की बात नहीं करती ..क्योंकि हिन्दू मूर्ख हैं...आज भाजपा राम मंदिर बनाना शुरू करे तो हिन्दू ही सबसे ज्यादा विरोध करेंगे... बाबरी ढांचा गिराने वाली पार्टी भाजपा ही है जिसे हिंदुओं ने यूपी की सत्ता से दूर रखा ..और हिंदुओं पर गोली चलाने वाला दोगला मुलायम को.. हिंदुओं ने ही सत्ता सौंपी और आज लात खा रहे हैं।

हने हमारे पुरखो की कट्टरता के कारण ही विजय मिली...बस वही उर्जा मैं नवयुवकों मे भरने का प्रयास करता हूँ अपने पोस्ट के द्वारा। सबकुछ भाजपा सरकार नही करती भाइसाब.. कुछ तो हमे ही करना होगा। भाजपा सरकार सहायक हो सकती हे

आप कट्टर बनेंगे तो सरकार भी कट्टर मिलेगी ...सरकार आपमे से ही कोई चलाता है...अपनी रक्षा स्वम करो।


Vithal Vyas
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Tarishi Jain मत बनिए, अपने बगल में पल रहे अजगर को पहचानिये ...

"हाँ ... हैं मेरे 3 मुस्लिम पति, कर लो क्या कर लोगे मेरा" ऐसा बुर्का दत्त ने कहा था।

ऐसे लोगों को Dhimmi कहा जाता है । यूँ धिम्मी का Dictionary meaning है , किसी इस्लामिक राज्य का ऐसा विधर्मी जिसे जज़िया चुकाने के एवज़ में राज्य की सुरक्षा और विशेषाधिकार प्राप्त हों और जिसे शरिया क़ानून से छूट मिली हुई हो ।

मुझे ढाका में मारी गयी Tarishi Jain से कोई हमदर्दी नहीं अब नहीं हो पा रही है... उसी तरह मुझे दिल्ली के उस dentist से भी कोई हमदर्दी नहीं , वो जिसे कुछ मुल्ले बांग्लादेशियों ने उसके घर में घुस के मार दिया था ...इसी तरह मुझे बंगाल के उन हिंदुओं से भी कोई हमदर्दी नहीं , जो वहाँ रोज़ाना मोमता बानो के राज में पिटते हैं । 

Tarishi Jain नव सेक्युलर धिम्मी प्रजाति की वो जीव थी जो बांग्लादेश जैसे घटिया गलीज देश में जिसका नाम भर लेने से घिन आती है वहाँ अपने गोभक्षी मित्रों के साथ छुट्टियां मनाने गयी थी .... Tarishi Jain का जब नाम आता है तो मुझे उस लड़की की कहानी याद आती है जिसने एक अजगर का बच्चा पाल रखा था , और वो उस से इतना प्यार करती थी कि उसी के साथ ही सोती थी ।

उस लड़की ने अपने स्कूल में निबंध लिखा , my favourite pet तो उस अजगर का ज़िक्र किया । निबंध पढ़ के उसकी teacher डर गयी और उसने इस लड़की को चेताया । लड़की ने कहा कि नहीं मेरा प्यारा अजगर तो बड़ा मासूम है । वो मुझे कुछ नहीं कहता । तब उसकी teacher ने पूछा , क्या जब ये तुम्हारे साथ सोया होता है तो अपने शरीर को stretch कर लंबा करने की कोशिश करता है ।

हाँ करता तो है ........

हाँ बेटा , वो अपने शरीर को खींच के लंबा कर रहा है और उस दिन की इंतज़ार कर रहा है , जिस दिन वो तुम्हें निगल के पचा सके ... याद रखिये कि आपके बगल में एक मासूम सा अजगर पल रहा है जो रोज़ खुद को खींच के लंबा कर रहा है ....... उस दिन के इंतज़ार में , कि आपको निगल सके ।

Tarishi Jain मत बनिए, अपने बगल में पल रहे अजगर को पहचानिये ...
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अमीर बनने पर एक मुस्लिम क्या करता है-

1. हज़ जाता है। 
2. मदरसा खोलता है। 
3. हिन्दुओं को मुस्लिम बनाने में सहयोग करता हैं। 
4. आतंकवाद के लिए धन मुहिया करवाता है।

अमीर बनने पर एक हिन्दू क्या करता है-

1. साईं (चाँद मुहम्मद) की संध्या करवाता है।
2. होटल, बार , शॉपिंग माल में जाने लगता है।
3. विदेश में छुट्टियां बनाने जाता है।
4. थाईलैंड में मसाज करवाने जाता है।

जिस जाति का धनी वर्ग उसकी रक्षा, उसके विकास और उसकी वृद्धि में कोई सहयोग नहीं देगा तो उस जाति का भविष्य अंधकारमय नहीं तो क्या होगा?

मित्रों जरा सोचो!
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एक बार एक मुसलमान ने मुझसे पूछा- भैया तुम क्यों हम मुसलमानो से इतनी नफरत करते हो।#विट्ठलव्यास
मैंने कहा मैंने कब नफरत की तुमसे बताओ ।
वो कहने लगा तुम्हारी कट्टर हिन्दू वाली बातें और तुम्हारे पोस्ट से ही पता चलता है की तुम हमसे कितनी घृणा करते हो।
अब मैंने पूछा मियां तुम सूअर से इतनी घृणा करते हो भला सूअर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है।
उसने कहा- क्योंकि हमारे मजहब सूअर हराम है।
मैंने पूछा क्यों हराम है- क्योंकि ये एक गन्दा जानवर है। मल- मूत्र खाने वाला और गंदगी फ़ैलाने वाला जानवर है।
मैंने कहा- यदि किसी सूअर को महंगे से साबुन से नहला कर परफ्यूम लगा कर साफ जगह पर रखा जाए तो क्या तब भी उससे नफरत करोगे।
उसने कहा- हाँ , क्योंकि सूअर तो सूअर है चाहे उसे जितना भी नहला साफ़ रख लो वह तो गंद फैलायेगा ही।
चाहे उसे जन्नत जैसी जगह पर भी रखो वो तो वहां भी जहन्नुम मचा देगा।
मैंने कहा - बिलकुल ठीक कहा तुमने जैसे सूअर सूअर ही रहता है वैसे ही मुसलमान मुसलमान रहता है। उसे दुनियां के किसी भी हिस्से में बसाया जाये वहां वो जिहाद नाम की गंदगी फैलाता है। यूरोप एशिया अमेरिका...... कहाँ आतंक नहीं फैला रखा है।
तुमने सीरिया इराक अफगान लीबिया लेबनान....... किसे छोड़ा है।
स्वर्ग जैसे कश्मीर को नर्क बना डाला।
तुम में और सूअर में फर्क ही क्या है।
फिर भी अजीब बात है सूअर तुम्हारे लिए हराम है।
अब वो मुझे जलती हुई आँखों से देखकर बोला- तुम कुछ ज्यादा आगे बढ़ गए हो।
मैंने कहा मियां सच तो सच होता है बुरा तो लगेगा ही।
उसने कहा ,अच्छा तो क्या तुम हिन्दू सुअरो से प्यार करते हो।
मैंने कहा मियां हिन्दू धर्म में किसी भी प्राणी से घृणा करना नहीं सिखाते । 

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 भारत सोने की चिड़िया नाही बल्कि "सोने का बाज"रहा होगा.
जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बने थे तभी उन्होंने कहा था ना खाऊंगा ना खाने दूंगा इस पर लोगो ने उनका बहुत मजाक उड़ाया था कालेधन पर उनकी घोषणा पर भी उन्हें जुमलेबाज और ना जाने क्या क्या संज्ञाएँ देकर उनके ईमानदारी और मेहनत से किये कार्य का मजाक उड़ाया....लेकिन हम कितने अज्ञानी है और देश के प्रति कितने लापरवाह है ये रिपोर्ट पढ़कर हमे अंदाजा लग जायेगा कि चोर लोगो ने देश को किस कदर लूटा. नोटबंदी जैसा फैसला लेने के लिए कलेजा लगता है और मोदी जी का ये निर्णय देश को क्या दे गया देखिए.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बीते 3 साल में 71 हजार 941 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति मिली है। सरकार ने बताया कि ये पैसा इनकम टैक्स (IT) डिपार्टमेंट की बड़े पैमाने पर की गई सर्चिंग और सर्वे के दौरान मिला। नोटबंदी के दौरान 5400 करोड़ जमा हुए...
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कोर्ट को बताया कि 9 नवंबर से 10 जनवरी तक नोटबंदी के दौरान 5400 करोड़ की अघोषित आय जमा हुई। इसमें 303.367 किलो का सोना जब्त हुआ।
सरकार ने 1 अप्रैल, 2014 से 28 फरवरी, 2017 तक की अघोषित आय का ब्यौरा दिया है। इसमें नोटबंदी का समय भी शामिल है।सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दिए एफिडेविट के मुताबिक, "तीन सालों के दौरान आईटी डिपार्टमेंट ने 2,027 ग्रुप्स पर छापे मारे, जिसमें 36,051 करोड़ से ज्यादा की अघोषित आय बरामद हुई। इसके अलावा 2890 करोड़ की अघोषित संपत्ति भी जब्त की।
3 साल में 15000 सर्वे किए
एफिडेविट के मुताबिक, आईटी डिपार्टमेंट ने 1 अप्रैल, 2014 से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक 15 हजार सर्वे किए, जिसमें 33 हजार करोड़ की अघोषित आय का पता चला।
सरकार ने नोटबंदी के अचीवमेंट्स बताते हुए कहा कि 9 नवंबर से शुरू हुई नोटबंदी के 2 महीनों के दौरान आईटी डिपार्टमेंट द्वारा सख्त कदम उठाए गए।
नोटबंदी के दौरान आईटी डिपार्टमेंट ने 1100 सर्चिंग-सर्वे और 5100 वेरिफिकेशंस किए। इस कार्रवाई के चलते 610 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई, जिसमें 513 करोड़ का कैश शामिल है।
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने उस बात को खारिज कर दिया था, जिसमें 500 और 1000 के पुराने नोटों को बदलने के लिए और मोहलत देने की बात कही गई थी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 11 जुलाई को गृह मंत्रालय ने कहा था कि इंटेलिजेंस एजेंसीज के मुताबिक पुराने नोटों को बदलने का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हो रहा था।
एफिडेविट के मुताबिक, "नवंबर 2016 में 147.9 करोड़ और दिसंबर में 306.897 करोड़ रु. का कैश जब्त किया गया। वहीं नवंबर में 69.1 किलो और दिसंबर 2016 में 234.267 किलो सोना जब्त किया गया।"
नोटबंदी के दौरान गड़बड़ियों के चलते 400 से ज्यादा मामले सीबीआई और एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) को रैफर किए गए।
देश के लोगो को समझना होगा कि मोदी जी वो शख्स है जो देशहित में कड़े निर्णय लेते वक्त वोट बैंक का ख्याल नही रखते.
Abhay Arondekar