Thursday, 19 October 2017

और मुश्किल होगा चीनी माल का बिकना..
  चीन से होने वाले सस्ते आयात पर नियंत्रण के लिए भारत ने पू्ंजीगत और उपभोक्ता मालों पर मानकों को ज्यादा कड़ा कर दिया है. नये नियम खास तौर पर खिलौनों, इलेक्ट्रॉनिक, मशीनों, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल और निर्माण से जुड़े सामानों पर लागू होंगे. इन सभी क्षेत्रों में भारत में चीन का काफी सामान आयात किया जाता है.
खिलौनों की जांच में इस्तेमाल किया जाने वाले केमिकल और ज्वलनशील पदार्थों पर ध्यान दिया जायेगा. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों पर विशेष ध्यान रहेगा. भारत के 76 करोड़ डॉलर के खिलौना बाजार में चीन की 85 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. इसमें पचास रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक के खिलौने शामिल हैं.
चीन की कंपनियों के लिए भी  काफी मुश्किलें होगीं. खासकर बिजली वितरण और टेलीकॉम के व्यवसाय में संभावित निवेश करने वाली कंपनियों को सख्त नियमों की सामना करना होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक जिन भी सेक्टर्स में नये नियम सख्ती से लागू किये जा रहे हैं उसके दो तिहाई बाजार में चीन का प्रभुत्व है. स्टील उद्योग में भी जल्द ही नये दिशा निर्देश जारी किये जाने हैं.__एसएस/एमजे (रॉयटर्स)/ डी डब्लू

Wednesday, 18 October 2017

sanskar

रेलवे लाइन बिछाने के लिए इस राजा ने दिया था अंग्रेजो को 1 करोड़ कर्ज, इंजन को खींचकर लाए थे हाथी
******************************
भारत को सोने की चीड़िया कहा जाता था ये सभी जानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं जब अंग्रेज भारत पर शासन करते थे उस दौरान वह यहां के राजाओं से कर्ज लेते थे. ऐसी ही एक कहानी है इंदौर के होलकर राजवंश के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय की, जिन्होंने ब्रिटिश गवर्नर को उस जमाने में एक करोड़ रुपए का कर्ज दिया था. आइए जानते हैं राजा ने ये कर्ज क्यों दिया था.
एक करोड़ का दिया था कर्ज
************************
महाराजा तुकोजीराव होलकर की कर्ज की कहानी को इतिहास भी मानता है. इंदौर के आसपास रेलवे के तीन सेक्शन को जोडऩे के लिए रेलवे लाइन बिछाने के लिए एक करोड़ रुपए का कर्ज दिया था. यह कर्ज 101 वर्ष के लिए 4.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर दिया गया था.
अपने राज्य में बिछाई रेलवे लाइन
***************************
तब इंदौर पहला राज्य था, जिसने अपने यहां रेलवे लाइन बिछाई. इसके साथ ही होलकर पहला ऐसा राजघराना बना जिसने किसी भी सरकार को कर्ज दिया था. ब्रिटिश गवर्नर ने तुकोजीराव होलकर द्वितीय से 1869 में एक करोड़ रुपए का कर्ज लिया था. इसके बाद 1870 में शुरू हुआ था 79 मील लंबी इंदौर-खंडवा रेलवे लाइन पर काम.
मुफ्त में दी थी जमीन
*****************
महाराजा तुकोजीराव होलकर ने द्वितीय रेलवे की स्थापना और उसके लाभ को समझते हुए उन्होंने अंग्रेजो को कर्ज दिया था. हैरानी की बात तो ये है कि राजा ने न केवल एक करोड़ का कर्ज दिया था बल्कि मुफ्त में जमीन भी मुहैया कराई थी. 25 मई 1870 को शिमला में वायसरॉय और गर्वनर जनरल इन कौंसिल ने इस समझौते पर मुहर लगाई थी.
होलकर स्टेट रेलवे के नाम से जाना जाता था
***********************************
तुकोजीराव होलकर (1844-86) के कार्यकाल में खंडवा से अजमेर तक रेलवे लाइन बिछाने की योजना 1869 में बनाई गई थी. इस रेलवे लाइन को होलकर स्टेट रेलवे कहा गया. पूरे जिले में रेलवे लाइन की कुल लंबाई 117.53 किमी थी. जो रेलवे के तीन सेक्शन इंदौर-खंडवा, इंदौर-रतलाम-अजमेर और इंदौर- देवास-उज्जैन में बंटी थी.
पहला इंजन खंडवा पटरियों पर हाथियों द्वारा खींचकर लाया गया था
******************************************************
जब ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर राजा ने ये रेलवे लाइन बनाने की तैयारी शुरू की उस दौरान इतनी सुविधाएं नहीं थी कि रेलवे के भारी समाना को कही से लाया और ले जाया जा सके. ऐसे में रेलवे इंजन हाथियों द्वारा खींचकर ट्रैक तक लाया गया था.
1877 में शुरू हुई रेलवे लाइन
************************
1877 में रेलवे पूरी तरह काम करने लगी थी. इंदौर से उज्जैन तक फैली इस रेलवे लाइन को राजपूताना-मालवा रेलवे भी कहा जाता था...।
कुछ बहुत थोड़े से संगठनों की वजह से आप पूरे मुस्लिम समाज को बदनाम नही कर सकते। बस ये गिनी चुनी इस्लामी संस्थाएं हैं जो इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने का काम करती हैं । 
आइये इन्हे जाने -
1.Al-Shabab (Africa),
2.Al Murabitun (Africa),
3.Al-Qeada (Afghanistan),
4.Al-Qaeda (Islamic Maghreb),
5.Al-Qaeda (Indian Subcontinent),
6.Al-Qaeda (Arabian Peninsula),
7.Hamas (Palestine),
8.Palestinian Islamic Jihad (Palestine),
9.Popular Front for the Liberation of (Palestine),
10.Hezbola (Lebanon),
11.Ansar al-Sharia-Benghazi (Lebanon),
12.Asbat Al-Ansar (Lebanon),
13.ISIS (Iraq),
14.ISIS (Syria),
15.ISIS (Cauacus)
16.ISIS (Libya)
17.ISIS (Yemen)
18.ISIS (Algeria),
19.ISIS (Philippines)
20.Jund al-Sham (Afganistan),
21.Al-Mourabitoun (Lebanon),
22.Abdullah Azzam Brigades (Lebanon),
23.Al-Itihaad al-Islamiya (Somalia),
24.Al-Haramain Foundation (Saudi Arabia),
25.Ansar-Al-Sharia (Moroccon),
26.Moroccon Mudjadine (Morocco),
27.Salafia Jihadia (Morocco),
28.Boko Haram (Afrika),
29.Islamic movement of (Uzbekistan),
30.Islamic Jihad Union (Uzbekistan),
31.Islamic Jihad Union (Germany),
32.DRW True-Religion (Germany)
33.Fajar Nusantara Movement (Germany)
34.DIK Hildesheim (Germany)
35.Jaish-e-Mohammed (Kashmir),
36.Jaish al-Muhajireen wal-Ansar (Syria),
37.Popular Front for the Liberation of Palestine (Syria),
38.Jamaat al Dawa al Quran (Afghanistan),
39.Jundallah (Iran)
40.Quds Force (Iran)
41.Kata'ib Hezbollah (Iraq),
42.Al-Itihaad al-Islamiya (Somalia),
43.Egyptian Islamic Jihad (Egypt),
44.Jund al-Sham (Jordan)
45.Fajar Nusantara Movement (Australia)
46.Society of the Revival of Islamic 47.Heritage (Terror funding, WorldWide offices)
48.Taliban (Afghanistan),
49.Taliban (Pakistan),
50.Tehrik-i-Taliban (Pakistan),
51.Army of Islam (Syria),
52.Islamic Movement (Israel)
53.Ansar Al Sharia (Tunisia),
54.Mujahideen Shura Council in the Environs of (Jerusalem),
55.Libyan Islamic Fighting Group (Libya),
Movement for Oneness and Jihad in (West Africa),
56.Palestinian Islamic Jihad (Palestine)
57.Tevhid-Selam (Al-Quds Army)
58.Moroccan Islamic Combatant Group (Morroco),
59.Caucasus Emirate (Russia),
60.Dukhtaran-e-Millat Feminist Islamists (India),
61.Indian Mujahideen (India),
62.Jamaat-ul-Mujahideen (India)
63.Ansar al-Islam (India)
64.Students Islamic Movement of (India),
65.Harakat Mujahideen (India),
66.Hizbul Mujhaideen(India)
67.Lashkar e Islam(India)
68.Jund al-Khilafah (Algeria),
69.Turkistan Islamic Party,
70.Egyptian Islamic Jihad (Egypt),
71.Great Eastern Islamic Raiders' Front (Turkey),
72.Harkat-ul-Jihad al-Islami (Pakistan),
73.Tehreek-e-Nafaz-e-Shariat-e-Mohammadi (Pakistan),
74.Lashkar e Toyiba(Pakistan)
75.Lashkar e Jhangvi(Pakistan)
Ahle Sunnat Wal Jamaat (Pakistan),
76.Jamaat ul-Ahrar (Pakistan),
77.Harkat-ul-Mujahideen (Pakistan),
78.Jamaat Ul-Furquan (Pakistan),
79.Harkat-ul-Mujahideen (Syria),
80.Ansar al-Din Front (Syria),
81.Jabhat Fateh al-Sham (Syria),
82.Jamaah Anshorut Daulah (Syria),
83.Nour al-Din al-Zenki Movement (Syria),
84.Liwa al-Haqq (Syria),
85.Al-Tawhid Brigade (Syria),
86.Jund al-Aqsa (Syria),
87.Al-Tawhid Brigade (Syria),
88.Yarmouk Martyrs Brigade (Syria),
89.Khalid ibn al-Walid Army (Syria),
90.Hezb-e Islami Gulbuddin (Afganistan),
91.Jamaat-ul-Ahrar (Afganistan)
92.Hizb ut-Tahrir (Worldwide Caliphate),
93.Hizbul Mujahideen (Kasmir),
94.Ansar Allah (Yemen),
95.Holy Land Foundation for Relief and Development (USA),
96.Jamaat Mujahideen (India),
97.Jamaah Ansharut Tauhid (Indonesia),
98.Hizbut Tahrir (Indonesia),
99.Fajar Nusantara Movement (Indonesia),
100.Jemaah Islamiyah (Indonesia),
101.Jemaah Islamiyah (Philippines),
102.Jemaah Islamiyah (Singapore),
103.Jemaah Islamiyah (Thailand),
104.Jemaah Islamiyah (Malaysia),
105.Ansar Dine (Africa),
106.Osbat al-Ansar (Palestine),
107.Hizb ut-Tahrir (Group connecting 108.Islamic Caliphates across the world into one world Islamic Caliphate)
109.Army of the Men of the Naqshbandi Order (Iraq)
110.Al Nusra Front (Syria),
111.Al-Badr (Pakistan),
112.Islam4UK (UK),
113.Al Ghurabaa (UK),
114.Call to Submission (UK),
115.Islamic Path (UK),
116.London School of Sharia (UK),
117.Muslims Against Crusades (UK),
118.Need4Khilafah (UK),
119.The Shariah Project (UK),
120.The Islamic Dawah Association (UK),
121.The Saviour Sect (UK),
123.Jamaat Ul-Furquan (UK),
124.Minbar Ansar Deen (UK),
125.Al-Muhajiroun (UK)
126.Islamic Council of Britain (UK)
127.Ahlus Sunnah wal Jamaah (UK),
128.Al-Gama'a (Egypt),
129.Al-Islamiyya (Egypt),
130.Armed Islamic men of (Algeria),
131Salafist Group for Call and Combat(Algeria),
132.Ansaru (Algeria),
133.Ansar-Al-Sharia (Libya),
134.Al Ittihad Al Islamia (Somalia),
135.Ansar al-Sharia (Tunisia),
136.Al-Shabab (Africa),
137.al-Aqsa Foundation (Germany)
138.al-Aqsa Martyrs' Brigades (Palestine),
139.Abu Sayyaf (Philippines),
140.Aden-Abyan Islamic Army (Yemen),
141.Ajnad Misr (Egypt),
142Abu Nidal Organization (Palestine),
143.Jamaah Ansharut Tauhid (Indonesia)
कई लोग गलत तरीके से इस्लाम को बदनाम करते हैं। इस्लाम शांति का धर्म है ।

इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण मिशन पूरे विश्व को दारुल इस्लाम बनाना है


 कुरान, हदीस, हिदाया, सीरतुन्नबी इस्लाम के बुनयादी ग्रन्थ है.इन सभी ग्रंथों में मुसलमानों को दूसरे धर्म वालो के साथ क्रूरतम बर्ताव करके उनके सामने सिर्फ़ इस्लाम स्वीकार करनाअथवा म्रत्यु दो ही विचार रखने होते है। इस्लाम में लूट प्रसाद केरूप में वितरण की जाती है...मानव एकता और भाईचारे के विपरीत कुरान का मूल तत्व और लक्ष्य इस्लामी एकता व इस्लामी भाईचारा है. गैर मुसलमानों के साथ मित्रता रखना कुरान में मना है. कुरान मुसलमानों को दूसरे धर्मो के विरूद्ध शत्रुता रखने का निर्देश देती है । कुरान के अनुसार जब कभी जिहाद हो ,तब गैर मुस्लिमों को देखते ही मार डालना चाहिए।कुरान में मुसलमानों को केवल मुसलमानों से मित्रता करने का आदेश है। सुरा ३ की आयत ११८ में लिखा है कि, "अपने (मजहब) के लोगो के अतिरिक्त किन्ही भी लोगो से मित्रता मत करो। "लगभग यही बात सुरा ३ कि आयत २७ में भी कही गई है, "इमां वाले मुसलमानोंको छोड़कर किसी भी काफिर से मित्रता न करे। "सन १९८४ में हिंदू महासभा के दो कार्यकर्ताओं ने कुरान की २४ आयातों का एक पत्रक छपवाया । उस पत्रक को छपवाने पर उनको गिरफ्तार कर लिया गया। परन्तु तुंरत ही कोर्ट ने उनको रिहा कर दिया। कोर्टने फ़ैसला दिया,"कुरान मजीद का आदर करते हुए इन आयतों के सूक्ष्म अध्यन से पता चलता है की ये आयते मुसलमानों को गैर मुसलमानों के प्रति द्वेषभावना भड़काती है............."उन्ही आयतों में से कुछआयतें निम्न है.....सुरा ९ आयत ५ में लिखा है,......."फ़िर जब पवित्र महीने बीत जायें तो मुशरिकों (मूर्ती पूजक) को जहाँ कहीं पाओ कत्ल करो और उन्हें pakdo व घेरो और हर घाट की जगह उनकी ताक में बैठो। यदि वे तोबा करले ,नमाज कायम करे,और जकात दे तो उनका रास्ता छोड़ दो। निसंदेह अल्लाह बड़ा छमाशील और दया करने वाला है। "सुरा ९ की आयत २३ में लिखा है कि,"हे इमां वालो अपने पिता व भाइयों को अपना मित्र न बनाओ ,यदि वे इमां कि अपेक्षा कुफ्र को पसंद करें ,और तुमसे जो मित्रता का नाता जोडेगा तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे। "इस आयत में नव प्रवेशी मुसलमानों को साफ आदेश है कि,जब कोई व्यक्ति मुस्लमान बने तो वह अपने माता , पिता, भाई सभी से सम्बन्ध समाप्त कर ले।सुरा ४ की आयत ..........."जिन लोगो ने हमारी आयतों से इंकार किया उन्हें हम अग्नि में झोंक देगे। जब उनकी खाले पक जाएँगी ,तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसा-स्वादन कर लें। निसंदेह अल्लाह ने प्रभुत्वशाली तत्व दर्शाया है।"सुरा ३२ की आयत २२ में लिखा है "और उनसे बढकर जालिम कोन होगा जिसे उसके रब की आयतों के द्वारा चेतायाजाए और फ़िर भी वह उनसे मुँह फेर ले।निश्चय ही ऐसे अप्राधिओं से हमे बदला लेना है। "सुरा ९ ,आयत १२३ में लिखा है की," हेइमां वालों ,उन काफिरों से लड़ो जो तुम्हारे आस पास है,और चाहिए कि वो तुममे शक्ति पायें।"सुरा २ कि आयत १९३ ............"उनके विरूद्ध जब तक लड़ते रहो, जब तक मूर्ती पूजा समाप्त न हो जाए और अल्लाह का मजहब(इस्लाम) सब पर हावीन हो जाए. "सूरा २६ आयत ९४ ..................."तो वे गुमराह (बुत व बुतपरस्त) औन्धे मुँह दोजख (नरक) की आग में डाल दिए जायंगे."सूरा ९ ,आयत २८ ......................."हे इमां वालों (मुसलमानों) मुशरिक (मूर्ती पूजक) नापाक है। "गैर मुसलमानों को समाप्त करने के बाद उनकी संपत्ति ,उनकी औरतों,उनके बच्चों का क्या किया जाए ? उसके बारे में कुरान ,मुसलमानों कोउसे अल्लाह का उपहार समझ कर उसका भोग करना चाहिए।सूरा ४८ ,आयत २० में कहा गया है,....."यह लूट अल्लाह ने दी है। "सूरा ८, आयत ६९..........."उन अच्छी चीजो का जिन्हें तुमने युद्ध करके प्राप्त किया है,पूरा भोग करो। "सूरा १४ ,आयत १३ ............"हम मूर्ती पूजकों को नष्ट कर देंगे और तुम्हेउनके मकानों और जमीनों पर रहने देंगे।"सूरा ४ ,आयत २४.............."विवाहित औरतों के साथ विवाह हराम है , परन्तु युद्ध में माले-गनीमत के रूप में प्राप्त की गई औरतें तो तुम्हारी गुलाम है ,उनके साथ विवाह(बलात्कार) करना जायज है। 
कुमार अवधेश सिंह
16 घंटे 
 
औरंगज़ेब इतिहास की दृष्टि में नायक या खलनायक 

मुगल खानदान में सबसे लम्बे समय तक राज औरंगज़ेब का रहा था। जितना लम्बा औरंगज़ेब का राज था उतनी ही लम्बी उसके अत्याचारों की सूची थी। भारत के 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात पाठ्यकर्म में इतिहास के उन रक्तरंजित पृष्ठों को जिनमें मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अथाह अत्याचार किये थे स्थान नहीं दिया गया। देश के नीतिकारों का मानना था कि इससे हिन्दू -मुस्लिम वैमनस्य फैलेगा। मेरे विचार से यह सोच अपरिपक्वता की बोधक है। देशवासियों को सत्य के दिग्दर्शन करवाने से देश के नागरिकों विशेष रूप से मुसलमानों को जितना सत्य का बोध होगा, उतने वे अपने आपको भारतीयता के निकट समझेगे। जब समस्त देशवासियों को चाहे हिन्दू हो या मुसलमान यह बोध होगा कि सभी के पूर्वज श्री राम और श्री कृष्ण जी को अराध्य रूप में मानते थें। इससे धर्म के नाम पर होने वाले विवाद अपने आप रुक जाते। सत्य की आवाज़ का गला दबाने के कारण रह रहकर यह उठती रही और इस समस्या का हल निकालने के स्थान पर उसे और अधिक विकट बनता रहा। कुछ अवसरवादी लोग अपने क्षणिक लाभों की पूर्ति के लिए उनका गलत फायदा उठाते रहते हैं। ऐसा ही अन्याय औरंगज़ेब को आलमगीर, जिन्दा पीर और महान शासक बताने वाले लोगों ने देशवासियों के साथ किया हैं। 

औरंगजेब को न्यायप्रिय एवं शांतिदूत सिद्ध करने के लिए एक छोटी सी पुस्तक "इतिहास के साथ यह अन्याय: प्रो बी एन पाण्डेय" हाल ही में प्रकाशित हुई है । पुस्तक के लेखक दुनिया के सबसे अनभिज्ञ प्राणी के समान व्यवहार करते हुए लिखता है कि औरंगजेब ने अपने आदेशो में किसी भी हिन्दू मंदिर को कभी तोड़ने का हुकुम नहीं दिया। अपितु औरंगज़ेब द्वारा अनेक हिन्दू मंदिरों को दान देने का उल्लेख मिलता हैं। लेखक ने बनारस के विश्वनाथ मंदिर को दहाने के पीछे यह कारण बताया है कि औरंगजेब बंगाल जाते समय बनारस से गुजर रहा था। उसके काफिले के हिन्दू राजाओं ने उससे विनती की कि अगर बनारस में एक दिन का पड़ाव कर लिया जाये तो उनकी रानियाँ बनारस में गंगा स्नान और विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करना चाहती हैं। औरंगजेब ने यह प्रस्ताव तुरंत स्वीकार कर लिया। सैनिकों की सुरक्षा में रानियां गंगा स्नान करने गई। उनकी रानियों ने गंगा स्नान भी किया और मंदिर में पूजा करने भी गई। लेकिन एक रानी मंदिर से वापिस नहीं लौटी। औरंगजेब ने अपने बड़े अधिकारियों को मंदिर की खोज में लगाया। उन्होंने देखा की दिवार में लगी हुई मूर्ति के पीछे एक खुफियाँ रास्ता है और मूर्ति हटाने पर यह रास्ता एक तहखाने में जाता है। उन्होंने तहखाने में जाकर देखा की यहाँ रानी मौजूद है। जिसकी इज्जत लूटी गई और वह चिल्ला रही थी। यह तहखाना मूर्ति के ठीक नीचे बना हुआ था। राजाओं ने सख्त कार्यवाही की मांग की। औरंगजेब ने हुक्म दिया की चूँकि इस पावन स्थल की अवमानना की गयी है। इसलिए विश्वनाथ की मूर्ति यहाँ से हटाकर कही और रख दी जाये और मंदिर को तोड़कर दोषी महंत को सख्त से सख्त सजा दी जाये। यह थी विश्वनाथ मंदिर तोड़ने की पृष्ठभूमि जिसे डॉक्टर पट्टाभि सीतारमैया ने अपनी पुस्तक "Feather and the stones" में भी लिखा हैं। आइये लेखक के इस प्रमाण की परीक्षा करे –

1. सर्वप्रथम तो औरंगजेब के किसी भी जीवन चरित में ऐसा नहीं लिखा है कि वह अपने जीवन काल में युद्ध के लिए कभी बंगाल गया था।

2. औरंगजेब के व्यक्तित्व से स्पष्ट था कि वह हिन्दू राजाओं को अपने साथ रखना नापसंद करता था क्यूंकि वह उन्हें "काफ़िर" समझता था।

3. युद्ध में लाव लश्कर को ले जाया जाता हैं ना कि सोने से लदी हुई रानियों की डोलियाँ लेकर जाई जाती हैं।

4. जब रानी गंगा स्नान और मंदिर में पूजा करने गयी तो उनके साथ सुरक्षा की दृष्टी से कोई सैनिक थे तो फिर एक रानी का अपहरण बिना कोलाहल के कैसे हो गया?

5. दोष विश्वनाथ की मूर्ति का था अथवा पाखंडी महंत का तो सजा केवल महंत को मिलनी चाहिए थी। हिन्दुओं के मंदिर को तोड़कर औरंगजेब क्या हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ नहीं कर रहा था?

6. पट्टाभि जी की जिस पुस्तक का प्रमाण लेखक दे रहे है सर्वप्रथम तो वह पुस्तक अब अप्राप्य है। दूसरे उस पुस्तक में इस घटना के सन्दर्भ में लिखा है कि इस तथ्य का कोई लिखित प्रमाण आज तक नहीं मिला है। केवल लखनऊ में रहना वाले किसी मुस्लिम व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति ने इसका मौखिक वर्णन देने के बाद। इस का प्रमाण देने का वचन दिया था। परन्तु उसकी असमय मृत्यु से उसका प्रमाण प्राप्त न हो सका। इस व्यक्ति के मौखिक वर्णन को प्रमाण बताना इतिहास का मजाक बनाने के समान ही है। कूल मिला कर यह औरंगजेब को निष्पक्ष घोषित करने का एक असफल प्रयास के अतिरिक्त ओर कुछ नहीं है।

सत्य तो इतिहास है और इतिहास का आंकलन अगर औरंगजेब के फरमानों से ही किया जाये तो निष्पकता उसे ही कहेंगे। फ्रेंच इतिहासकार फ्रैंकोइस गौटियर (Francois Gautier) ने औरंगजेब द्वारा फारसी भाषा में जारी किये गए फरमानों को पूरे विश्व के समक्ष प्रस्तुत कर सभी छदम इतिहासकारों के मुहँ पर ताला लगा दिया। जिसमे हिन्दुओं को इस्लाम में दीक्षित करने और हिन्दू मंदिरों को तोड़ने की स्पष्ट आज्ञा थी। ध्यान दीजिये औरंगजेब ने “आलमगीर” बनने की चाहत में अपनी सगे भाइयों की गर्दन पर छुरा चलाने से लेकर अपने बूढ़े बाप को जेल में डालकर प्यासा मारा था। तो उससे हिन्दू प्रजा की सलामती की इच्छा रखना बेईमानी होगी।

औरंगजेब द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने के लिए जारी किये गए फरमानों का कच्चा चिट्ठा

1. 13 अक्तूबर,1666- औरंगजेब ने मथुरा के केशव राय मंदिर से नक्काशीदार जालियों को जोकि उसके बड़े भाई दारा शिकोह द्वारा भेंट की गयी थी को तोड़ने का हुक्म यह कहते हुए दिया कि किसी भी मुसलमान के लिए एक मंदिर की तरफ देखने तक की मनाही है। और दारा शिको ने जो किया वह एक मुसलमान के लिए नाजायज है।

2. 12 सितम्बर 1667- औरंगजेब के आदेश पर दिल्ली के प्रसिद्द कालकाजी मंदिर को तोड़ दिया गया। 

3. 9 अप्रैल 1669 को मिर्जा राजा जय सिंह अम्बेर की मौत के बाद औरंगजेब के हुक्म से उसके पूरे राज्य में जितने भी हिन्दू मंदिर थे, उनको तोड़ने का हुक्म दे दिया गया और किसी भी प्रकार की हिन्दू पूजा पर पाबन्दी लगा दी गयी। जिसके बाद केशव देव राय के मंदिर को तोड़ दिया गया और उसके स्थान पर मस्जिद बना दी गयी। मंदिर की मूर्तियों को तोड़ कर आगरा लेकर जाया गया और उन्हें मस्जिद की सीढियों में गाड़ दिया गया और मथुरा का नाम बदल कर इस्लामाबाद कर दिया गया। इसके बाद औरंगजेब ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर का भी विध्वंश कर दिया।

4. 5 दिसम्बर 1671 औरंगजेब के शरीया को लागु करने के फरमान से गोवर्धन स्थित श्री नाथ जी की मूर्ति को पंडित लोग मेवाड़ राजस्थान के सिहाद गाँव ले गए। जहाँ के राणा जी ने उन्हें आश्वासन दिया की औरंगजेब की इस मूर्ति तक पहुँचने से पहले एक लाख वीर राजपूत योद्धाओं को मरना पड़ेगा।

5. 25 मई 1679 को जोधपुर से लूटकर लाई गयी मूर्तियों के बारे में औरंगजेब ने हुकुम दिया कि सोने-चाँदी-हीरे से सज्जित मूर्तियों को जिलालखाना में सुसज्जित कर दिया जाये और बाकि मूर्तियों को जामा मस्जिद की सीढियों में गाड़ दिया जाये।

6. 23 दिसम्बर 1679 औरंगजेब के हुक्म से उदयपुर के महाराणा झील के किनारे बनाये गए मंदिरों को तोड़ा गया। महाराणा के महल के सामने बने जगन्नाथ के मंदिर को मुट्ठी भर वीर राजपूत सिपाहियों ने अपनी बहादुरी से बचा लिया।

7. 22 फरवरी 1680 को औरंगजेब ने चित्तोड़ पर आक्रमण कर महाराणा कुम्भा द्वाराबनाएँ गए 63 मंदिरों को तोड़ डाला।

8. 1 जून 1681 औरंगजेब ने प्रसिद्द पूरी का जगन्नाथ मंदिर को तोड़ने का हुकुम दिया।

9. 13 अक्टूबर 1681 को बुरहानपुर में स्थित मंदिर को मस्जिद बनाने का हुकुम औरंगजेब द्वारा दिया गया।

10. 13 सितम्बर 1682 को मथुरा के नन्द माधव मंदिर को तोड़ने का हुकुम औरंगजेब द्वारा दिया गया। इस प्रकार अनेक फरमान औरंगजेब द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने के लिए जारी किये गए।

हिन्दुओं पर औरंगजेब द्वारा अत्याचार करना

2 अप्रैल 1679 को औरंगजेब द्वारा हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया गया जिसका हिन्दुओं ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर शांतिपूर्वक विरोध किया परन्तु उसे बेरहमी से कुचल दिया गया। इसके साथ-साथ मुसलमानों को करों में छूट दे दी गयी जिससे हिन्दू अपनी निर्धनता और कर न चूका पाने की दशा में इस्लाम ग्रहण कर ले। 16 अप्रैल 1667 को औरंगजेब ने दिवाली के अवसर पर आतिशबाजी चलाने से और त्यौहार बनाने से मना कर दिया गया। इसके बाद सभी सरकारी नौकरियों से हिन्दू कर्मचारियों को निकाल कर उनके स्थान पर मुस्लिम कर्मचारियों की भरती का फरमान भी जारी कर दिया गया। हिन्दुओं को शीतला माता, पीर प्रभु आदि के मेलों में इकठ्ठा न होने का हुकुम दिया गया। हिन्दुओं को पालकी, हाथी, घोड़े की सवारी की मनाई कर दी गयी। कोई हिन्दू अगर इस्लाम ग्रहण करता तो उसे कानूनगो बनाया जाता और हिन्दू पुरुष को इस्लाम ग्रहण करनेपर 4 रुपये और हिन्दू स्त्री को 2 रुपये मुसलमान बनने के लिए दिए जाते थे। ऐसे न जाने कितने अत्याचार औरंगजेब ने हिन्दू जनता पर किये और आज उसी द्वारा जबरन मुस्लिम बनाये गए लोगों के वंशज उसका गुण गान करते नहीं थकते हैं।

एक मुहावरा है कि एक जूठ को छुपाने के लिए हज़ार जूठ बोलने पड़ते हैं। औरंगज़ेब को न्यायप्रिय घोषित करने वालों ने तो उसके अत्याचार और मतान्धता को छुपाने के लिए इतने कमजोर साक्ष्य प्रस्तुत किये जो एक ही परीक्षा में ताश के पत्तों के समान उड़ गए। यह भारत के मुसलमानों के समक्ष यक्ष प्रश्न है कि उनके लिए आदर्श कौन है?

औरंगज़ेब जैसा अत्याचारी अथवा उसके अत्याचार का प्रतिकार करने वाले वीर शिवाजी महाराज। 

डॉ विवेक आर्य 

सन्दर्भ लेख 

1. फ्रैंकोइस गौटियर (Francois Gautier) द्वारा प्रकाशित औरंगज़ेब के फारसी भाषा के फरमानों की सूची 

2. कोनरेड एल्स्ट (Koenraad Elst) द्वारा प्रकाशित लेख Why did Aurangzeb Demolish the Kashi Vishvanath? 

3. इतिहास के साथ यह अन्याय: प्रो बी एन पाण्डेय
 — कुमार सुधाकर के साथ.

manmohan singh praman hai bharat ki gulami ka ...

घटनाक्रम है इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल (Emergency ) का ..
उस समय भारत की रिजर्व बैक का पदेन निदेशक था मनमोहन सिंह नाम का एक नौकरशाह …….
बर्ष 1977  डाक्टर इन्द्रप्रसाद गोवर्धन भाई पटेल रिजर्ब बैंक आफ इण्डिया के गवर्नर . उसी समय बैक आफ क्रेडिट एंड कामर्स इंटरनेशनल जिसका अध्यक्ष एक पाकिस्तानी था .. ने भारत में अपनी व्यावसायिक शाखा खोलने के लिये आवेदन दिया .... रिजर्व बैक आफ इण्डिया ने उसके आवेदन की जांच की तो पता चला की ये पाकिस्तानी बैंक काले धन को विदेशी बैंको में भेजने का काम करता है जिसे मनी लांड्रिंग कहते है इसलिए इसको अनुमति नहीं दी गयी ...
 गवर्नर आई जी पटेल को प्रलोभन मिला की अगर बो इस बैक को अनुमति देने में सहयोग करते है तो उनके ससुर और प्रख्यात अर्थशास्त्री ए.के.दासगुप्ता के सम्मान में एक अंतराष्ट्रीय स्तर की संस्था खोली जायेगी ..पर ईमानदार गवर्नर उस प्रलोभन में नहीं फंसे ...इस वीच आई जी पटेल की सेवानिवृत्ति का समय पास आ चुका था 
अंतिम दिनों में उनको पाकिस्तानी बैंक BCCI के मुम्बई प्रतिनिधि कार्यालय से एक फोन आया जिसमें उनसे निवेदन किया गया की बो BCCI के अध्यक्ष आगा हसन अबेदी से एक बार मुलाक़ात कर ले ... RBI के गवर्नर ने इसकी अनुमति दी लेकिन मुलाक़ात से एक दिन पहले उनके पास फोन आया की अब मुलाक़ात की कोई जरुरत नहीं है क्यों की जो काम मुंबई में होना था अब दो दिल्ली में हो चुका है .. साथ ही उनको बताया गया की बो जल्दी ही सेवानिवृत्त होने बाले है .....!
समय 23-06-1980 के बाद का इंदिरा गाँधी के पुत्र संजीव गाँधी उर्फ संजय गांधी की म्रत्यु से खाली हुए शक्ति केंद्र पर राजीव गाँधी की पत्नी का कब्ज़ा ... उस समूह में शामिल थे बी. के नेहरु जिन्हें पाकिस्तानी बैंक BCCI ने पहले से ही सम्मानित कर रक्खा था ...!!
 आई जी पटेल सेवानिवृत ..एक दिन बाद मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बने .....
-1980 इंदिरा गाँधी फिर से देश की प्रधानमंत्री बनी केंद्रीय सत्ता के अज्ञात और अनाम समूह ने पाकिस्तानी बैंक BCCI के अध्यक्ष आगा हसन अबेदी को विश्वास दिलाया की मनमोहन सिंह ही भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बनेगे शायद इसीलिये अध्यक्ष आगा हसन अबेदी ने आई जी पटेल से मुम्बई में अपनी मुलाक़ात केंसिल की थी ....!
कालखंड सन 1983 .....
भारतीय गुप्तचर एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस बिंग के बिरोध के बाबजूद पाकिस्तानी बैंक BCCI को मुम्बई में पूर्ण व्यावसायिक शाखा खोलने की अनुमति मिली जिसका मुख्यालय लंदन में ..! पाकिस्तानी मूल के नागरिक आगा हसन अबेदी की भारत के बित्त मंत्रालय में घुसपैठ का अंदाज इस बात से लगाए की उसको पहले ही सूचना मिल गयी की मनमोहन ही भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर होगे ... इस वीच मनमोहन की बेटी की बिदेश में पढ़ाई के लिये छात्रवृत्ति की व्यवस्था .!
15-09-1982 मनमोहन सिंह  रिजर्व बैंक के गवर्नर बने ..इस पद पर उनको तीन साल का कार्यकाल पूरा करना था लेकिन इस वीच बोफोर्स कांड सामने आया और मनमोहन ने अज्ञात कारणों से समय से पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद छोड़ अपनी पोस्टिंग योजना आयोग में करवाई ...! 
काल खंड बोफोर्स दलाली कांड के खुलासे के बाद का . लोकसभा चुनाव के बाद बी.पी. सिंह देश के प्रधानमंत्री बने .. लेकिन इससे पहले ही मनमोहन सिंह नाम के नौकरशाह ने भारत छोड़ जिनेवा की राह पकड़ी और सेक्रेटरी जनरल एंड कमिश्नर साऊथ कमीशन जिनेवा में पद ग्रहण किया ...!
काल खंड 10-11-1990
 कांग्रेस के समर्थन/ बैशाखियों से चंद्रशेखर भारत के प्रधानमंत्री बने . इसी दौर में फिर से मनमोहन सिंह ने जिनेवा की नौकरी छोड़ भारत की ओर रुख किया और राजीव गाँधी के समर्थन से बनी चंद्रशेखर सरकार में प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार का पद ग्रहण किया .इसी वीच देश में भुगतान संकट की स्थिति पैदा हुई और मनमोहन की सलाह पर भारत का कई टन सोना इंग्लैण्ड की बैंको में गिरवी रखना पड़ा .. जिसकी बदनामी आई प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के हिस्से में .!
नरसिंह राव के प्रधानमंत्री बनने के समय 
कांग्रेस की अल्पमत सरकार ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के पांच सदस्यों सहित कई सांसदों को खरीद कर अपनी सरकार बचाई .. सरकार बचाने के इस रिश्वती खेल को नाम मिला ‘’झारखण्ड मुक्ति मोर्चा रिश्बत कांड’’ जिसका केस भारत की अदालत में भी चला और कुछ सांसदों को जेल जाना पड़ा ...इसी सरकार में मनमोहन सिंह नाम का नौकरशाह भारत का बित्त मंत्री बना... प्रणव मुखर्जी के सचिब के रूप में प्रणब मुखर्जी के आधीन काम करने बाले इस नौकरशाह की ताकत और तिकडमो का अंदाज तो लगाईये .....की उन्ही प्रणब मुखर्जी को इस नौकरशाह की प्रधानमंत्रित्व के नीचे वित्त मंत्री के रूप में काम करना पड़ा ....इनके खाते में शेयर बाजार का सबसे बड़ा घोटाला भी दर्ज है जिसे हर्सद मेहता कांड के नाम से जाना जाता है जिसमे देश की जनता को खरबो रुपये का चूना लगा था उस समय मनमोहन देश के वित्त मंत्री हुआ करते थे ... 
बाद के समय 2009 में इनकी सरकार बचाने के लिये एक बार फिर एक कांड हुआ जिसे देश .. कैश फार वोट ‘.. नाम के घोटाले के रूप में जनता है ..... 
इन सब बातो के बाबजूद अगर देश के जादातर नेता समाजसेवी .. बुद्धिजीवी और अन्ना जैसे अनशनकारी इनको व्यक्तिगत रूप से ईमानदार होने का सार्टिफिकेट देते है और भारत का मीडिया भी इनको मिस्टर क्लीन की उपाधि देता है ... तो इसे भारत का दुर्भाग्य कहा जाए या बिडंबना इसका निर्णय आप स्वयं करे ......!
साभार ... रमेश लक्ष्मण तांबे की पुस्तक .. भ्रष्ट नौकरशाह का सफर , बी सी .आई से डी सी . सी आई तक ‘’.....................!

ताजमहल पूजा की निशानी नहीं, ज्यादातर मुगल थे अय्याश: यूपी शिया वक्फ बोर्ड चेयरमैन सईद वसीम रिजवी
ताजमहल पर बीजेपी नेता संगीत सोम द्वारा दिए बयान से मचे बवाल में अब उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन भी कूद पड़े हैं। चैयरमैन सईद वसीम रिजवी ने मंगलवार को कहा कि यह ऐतिहासिक स्थल 'पूजा' का सिंबल नहीं हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर मुगल 'अय्याश' थे।
रिजवी ने कहा, 'ताजमहल प्यार की निशानी हो सकती है, लेकिन पूजा की नहीं। एक-दो मुगलों को छोड़ दें तो ज्यादातर मुगल अय्याश थे। मुसलमान उन्हें अपना आइडल नहीं मानते हैं।' यूपी सरकार द्वारा अयोध्या में भगवान राम की 100 मीटर ऊंची प्रतिमा बनाने के प्रस्ताव की हो रही आलोचना पर कहा, 'मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि यह मुद्दा ही क्यों है। जब मायावती ने अपनी खुद की प्रतिमा बनवाई तो किसी ने विरोध नहीं किया। तो फिर राम की प्रतिमा बनाने के प्रस्ताव पर विरोध क्यों हो रहा है?' उन्होंने कहा कि राम की प्रतिमा का निर्माण एक अच्छा कदम होगा क्योंकि अयोध्या हिंदुओं की आस्था का केंद्र है।
गौरतलब है कि सोमवार को बीजेपी नेता संगीत सोम ने कहा था कि गद्दारों के बनाए ताजमहल को इतिहास में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'ऐतिहासिक स्थलों में से ताज महल का नाम हटाने से कई लोगों को दुख हुआ। किस तरह का इतिहास? इतिहास में क्या है इसकी जगह? किसका इतिहास? ऐसे व्यक्ति का इतिहास जो हिंदुओं का उत्तर प्रदेश और पूरे भारत से सफाया करना चाहता था।' सोम के इस बयान के बात राजनीतिक बखेड़ा मच गया था। AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने पूछा था कि क्या पीएम लाल किला से तिरंगा फहराना छोड़ देंगे क्योंकि वह भी तो गद्दारों द्वारा ही बनवाया गया था।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, 'यह कोई मायने नहीं रखता कि इसे (ताज महल) किसने बनाया। यह भारतीयों के खून और पसीने से बना है।'
कुमार अवधेश सिंह