Tuesday, 25 July 2017

 जिन बिमारियों का इलाज डॉक्टर भी नहीं कर पा रहे उनका इलाज जोंक से किया जा रहा है...

दादी-नानी की कहानियों में खून चूसने के लिए कुख्यात माने जाने वाले जीव जोंक का इस्तेमाल असाध्य बीमारियों के इलाज में किया जा रहा है। जोंक के खून चूसने की स्वाभाविक खूबी के साथ सामंजस्य बैठाते हुए चिकित्सीय जगत में इसका उपयोग स्वच्छ रक्त के बजाय दूषित रक्त को निकालने में किया जा रहा है।
नॉएडा स्थित डा. चौहान आयुर्वेद के चिकित्सा डॉ. अक्षय चौहान ने बताया कि जोंक से उपचार की विधि को आयुर्वेद में जलौकावचारण विधि की संज्ञा दी जाती है। चिकित्सा विज्ञान में इस विधि को लीच थैरेपी भी कहा जाता है। लीच थैरेपी से डायबिटिक फुट, गैंगरिन, सोरायसिस, नासूर समेत कई बीमारियों का सफलता से इलाज हो रहा है। डीप वेन थ्रंबायोसिस जिसमें पैर कटवाने की नौबत आ जाती है, में यह विधि कारगर है। डॉ. अक्षय चौहान जी ने बताया कि पिछले कुछ वर्ष के दौरान इस विधि से अनेको बहुत मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज हो चुका हैक्या है लीच थैरेपी
जोंकों को प्रभावित अंगों के ऊपर छोड़ दिया जाता है। जोंक अपने मुंह से ऐसे एंजाइम का स्राव करते हैं जो व्यक्ति को यह अहसास ही नहीं होने देते कि शरीर से खून चूसा जा रहा है। कृमि प्रजाति के इस जीव की सबसे बड़ी खासियत इसके स्लाइवा में मिलने वाला हिरुडिन नामक एंजाइम है, जो रक्त में थक्का नहीं बनने देता है। इसके स्राव से स्वच्छ रक्त का प्रवाह तेजी से होता है। जोंक दूषित रक्त को ही चूसती है। एक बार में जोंक शरीर से 5 मिलीलीटर खून चूस लेती है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक प्रभावित अंग से दूषित रक्त को पूरी तरह चूस नहीं लिया जाता। दूषित रक्त की समाप्ति से स्वच्छ रक्त प्रवाह होता है जिससे जख्म जल्दी भरते हैं।
क्यों हो रही लोकप्रिय
डायबिटिक मरीजों के लिए शल्य क्रिया काफी खतरनाक मानी जाती है। इसकी वजह जख्मों को भरने में सामान्य के मुकाबले अत्यधिक समय लगता है। इस बीच कई बीमारियों के खतरे की आशंका बन जाती है। लीच थैरेपी इन सब मुसीबतों से निजात दिलाती है। और जख्म भी जल्दी भरता है.
रखा जाता है खास ख्याल
इंफेक्शन न हो, इसके लिए एक जोंक का एक ही मरीज के लिए प्रयोग किया जाता है। दूषित रक्त चूसने के बाद इनको उल्टी कराई जाती है, ताकि ये अपने मुंह से दूषित रक्त निकाल दें।
देखिए डॉक्टर ने कैसे इस मरीज का इलाज किया
यह मरीज पिछले 8 महीने से पैर के जख्म से पीड़ित था। लगातार एंटीबायोटिक (Antibiotic) के प्रयोग के बाद भी बिलकुल भी आराम नहीं हो रहा था। और जख्म की संख्या बढ़ती जा रही थी। पैर में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है अब तो चल भी नहीं सकता। पैर का जख्म वाला हिस्सा काला हो गया था, इस मरीज की Blood Report बिलकुल नार्मल है। एलोपैथिक डॉक्टर ने बताया कि यह SCHAMBERG DISEASE WITH PUNCHED OUT ULCER है।10 दिन पहले ये मरीज डॉक्टर चौहान जी के पास आया । उन्होंने इसे आचार्य सुश्रुत के अनुसार “दुष्ट व्रण” (लीच थेरेपी) की चिकित्सा प्रारम्भ कर दी। पैर का कालापन लगभग 50% कम हो गया। 7 दिन के बाद 50 ml रक्त निकाला। रक्त निकलते ही अगले दिन मरीज ने बताया कि पैर का दर्द बिल्कुल बंद हो गया। आज इस मरीज को 13 ज़ोक (leech) लगाई। लगभग 300 ml ब्लड निकाला। मरीज के अनुसार 10 दिन में उसकी 8 महीने पुरानी बीमारी में 50% आराम हो गया हैं।
साहस हिम्मत

मित्रों कई बार हमारे जीवन ऐसा समय आता है जब हम परेशानियों से गुजर रहे होते हैं। यही वो समय है जब एक इंसान की असली परीक्षा होती है, ज्यादातर लोग अक्सर इस समय टूट जाते हैं और अपने धैर्य को खो देते हैं। लेकिन इंसान को चाहिए कि वो ऐसे समय में विवेक से काम लें अपनी शक्तियों को ना भूलें और तनिक भी घबराएं नहीं क्यूंकि चाणक्य ने कहा है कि इंसान का साहस ऐसी चीज़ है जो हर समस्या को हरा सकता है।

एक छोटा सा प्रेरक प्रसंग(Hindi Kahaniyan) है
जिसे मैं यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ –

किसी जंगल में एक गधा रहता था,एक बार गधा जंगल में घास चर रहा था। अचानक वहां एक भेड़िया आता है, वो भेड़िया सोचता है कि क्यों ना आज इस गधे का शिकार किया जाये, काफी तंदरुस्त गधा है और ज्यादा मांस भी होगा तो दो तीन दिन का काम हो जायेगा। यही सोचकर वो गधे के पास जाता है और बोलता है – अरे गधे तेरे दिन अब ख़त्म हुए मैं तुम्हें खाने जा रहा हूँ।

अचानक गधा हक्काबक्का रह जाता है और बुरी तरह घबरा जाता है फिर भी वह साहस नहीं छोड़ता। फिर कुछ सोचकर भेड़िये से बोलता है – आपका स्वागत है श्रीमान! मुझे कल साक्षात भगवान ने सपने में आकर कहा था कि कोई बड़ा दयालु और बुद्धिमान जानवर आकर मेरा शिकार करेगा और मुझे इस दुनिया के बंधन से मुक्त करायेगा। मुझे लगता है कि आप ही वो दयालु और बुद्धिमान जानवर हैं।

भेड़िया सोचता है कि वाह ये तो खुद ही मेरा शिकार बनने को तैयार है ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी इसको मारने में। गधा फिर बोलता है – लेकिन महाराज मेरी एक आखिरी इच्छा है, मैं चाहता हूँ कि आप मुझे खाने से पहले मेरी आखिरी इच्छा जरूर पूरी करें।

भेड़िया बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं कहो क्या है तुम्हारी आखिरी इच्छा? गधा विनम्रता से बोला- महाराज मेरे पैर में एक छोटा पत्थर फंस गया है क्या आप उसे निकल देंगे? भेड़िया खुश होकर बोला- वाह इतना सा काम अभी करता हूँ, कहाँ है पत्थर ? फिर भेड़िया गधे के पीछे जाकर जैसे ही उसके पैर के पास गया, गधे ने भेड़िये के चेहरे पे इतनी जोर से लात मारी कि भेड़िया बहुत दूर जाकर गिरा। फिर उसके बाद गधा पूरी ताकत के साथ वहां से भाग निकला, भेड़िया देखता रह गया।

मित्रों ये एक कहानी मात्र नहीं है इस कहानी में आपकी बहुत सारी समस्याओं का हल छिपा है। आप चाहें तो भेड़िये रूपी परेशानियों के आगे हार मान सकते हैं या उन परेशानियों को अपने साहस के दम पर हरा सकते हैं।

हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ विलक्षणता जरूर होती है और परेशानियाँ तो जीवन का एक मुख्य हिस्सा हैं, कोई अमीर(Rich) हो या गरीब(Poor), छोटा हो या बड़ा, परेशानियाँ तो सबको आती है और आपके अंदर वो क्षमता भी है जो समस्याओं को हरा सकती है बस जरूरत है तो हिम्मत दिखाने कि, साहस से काम लेने की। परेशानियाँ बड़ी नहीं होती हैं बल्कि हमारे विचार ही समस्याओं को बड़ा या छोटा बनाते हैं।
चीन के ऊपर ऋण उसकी कई ट्रिलियन GDP का 282% गुना है*।
लन्दन के इकोनामिक टाइम्स का सन्दर्भ देते हुए INDIA TODAY में अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक स्थिति पर एक विवरण छपा है। जिसके अनुसार:-
1..वर्ष 2015 के बाद से भारत विश्व मे सबसे उभरती हुई इकोनामी है जो नरेंद मोदी के अथक प्रयासो के फलस्वरूप वर्ष 2020 तक कई क्षेत्रो में चीन से आगे निकल जायेगी।
2..इकोनामिक टाइम्स कहता है कि कर्ज आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है लेकिन चीन के ऊपर तो कर्ज का अंबार है।
कर्ज GDP से 150 गुना से ज्यादा नही होना चाहिए जबकि चीन के ऊपर ऋण उसकी कई ट्रिलियन GDP का 282% गुना है। इकोनॉमिक्स कहता है कि वैसे तो अमेरिका के ऊपर उसकी GDP का 331%गुना ज्यादा रिन है लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुधार पर है और चीन की और नीचे जा रही है।
3..भारत के ऊपर ऋण उसकी GDP का 135% है जो संतुलित तो है ही,पिछले 3 सालों से घटता भी जा रहा है।
4... चीन का कुल निर्यात उसकी GDP का 21% है जो मैनुफेक्चरिंग ड्राइवेन है जिसमे से 18% केवल अमेरिका को जाता है। जो चीन की GDP का 4% है। चीन को यंहा खतरा यह हो गया कि डोनॉल्ड ट्रंम्प का चीन के राष्ट्रपति से समझौता हुआ है कि वे चीन से आयात घटाते रहेगे ताकि उनकी मैनुफेक्चरिंग अमेरिका में हो और यंहा रोजगार बढ़े।
5..चीन के विपरीत भारत की मैनुफेक्चरिंग ड्राइवेन लोकल उपयोग के ऊपर आधारित है जो कम के बजाय ज्यादा ही होती जाएगी।
6.. भारत अपने services sector का export करता है जिसके भविष्य में और बढ़ने की अपार सम्भावनाये है।
वांशिगटन में ट्रंम्प-मोदी मुलाकात वार्ता में यह तय हुआ है कि अमेरिका भारत से services sector में आयात बढ़ाएगा।
7..अब चीन के निर्यात की कुंजी ट्रंम्प के हाथ मे। जैसे-जैसे
ट्रंम्प अमेरिका में चीन से आयात किये जाने वाले मैनुफेक्चरिंग गुड्स की मैनुफेक्चरिंग यूनिट्स अमेरिका में लगाते जाएंगे वैसे-वैसे चीन का निर्यात घटता जाएगा फलस्वरूप चीन की GDP भी घटेगी।
8..चीनी बैंक दिवालाइया होने की कगार पर खड़े है क्योंकि उनके द्वारा चीन में दिए गए ऋण की रिकवरी लगभग शून्य है।

Monday, 24 July 2017


अक्षौहिणी प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था जिसका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
किसी भी अक्षौहिणी सेना के चार विभाग होते थे:
गज (हाँथी सवार)
रथ (रथी)
घोड़े (घुड़सवार)
सैनिक (पैदल सिपाही)
इसके प्रत्येक भाग की संख्या के अंकों का कुल जमा 18 आता है। एक घोडे पर एक सवार बैठा होगा. हाथी पर कम से कम दो व्यक्तियों का होना आवश्यक है, एक पीलवान और दूसरा लडने वाला योद्धा. इसी प्रकार एक रथ में दो मनुष्य और चार घोडे रहे होंगें.
एक अक्षौहिणी सेना 9 भागों में बटी होती थी:
पत्ती: 1 गज + 1 रथ + 3 घोड़े + 5 पैदल सिपाही
सेनामुख (3 x पत्ती): 3 गज + 3 रथ + 9 घोड़े + 15 पैदल सिपाही
गुल्म (3 x सेनामुख): 9 गज + 9 रथ + 27 घोड़े + 45 पैदल सिपाही
गण (3 x गुल्म): 27 गज + 27 रथ + 81 घोड़े + 135 पैदल सिपाही
वाहिनी (3 x गण): 81 गज + 81 रथ + 243 घोड़े + 405 पैदल सिपाही
पृतना (3 x वाहिनी): 243 गज + 243 रथ + 729 घोड़े + 1215 पैदल सिपाही
चमू (3 x पृतना): 729 गज + 729 रथ + 2187 घोड़े + 3645 पैदल सिपाही
अनीकिनी (3 x चमू): 2187 गज + 2187 रथ + 6561 घोड़े + 10935 पैदल सिपाही
अक्षौहिणी (10 x अनीकिनी): 21870 गज + 21870 रथ + 65610 घोड़े + 109350 पैदल सिपाही
इस प्रकार एक अक्षौहिणी सेना में गज, रथ, घुड़सवार तथा सिपाही की सेना निम्नलिखित होती थी:
गज: 21870
रथ: 21870
घुड़सवार: 65610
पैदल सिपाही: 109350
इसमें चारों अंगों के 218700 सैनिक बराबर-बराबर बंटे हुए होते थे। प्रत्येक इकाई का एक प्रमुख होता था.
पत्ती, सेनामुख, गुल्म तथा गण के नायक अर्धरथी हुआ करते थे.
वाहिनी, पृतना, चमु और अनीकिनी के नायक रथी हुआ करते थे।
एक अक्षौहिणी सेना का नायक अतिरथी होता था.
एक से अधिक अक्षौहिणी सेना का नायक सामान्यतः एक महारथी हुआ करता था.
पांडवों के पास (7 अक्षौहिणी सेना):
153090 रथ
153090 गज
459270 अश्व
765270 पैदल सैनिक
कौरवों के पास (11 अक्षौहिणी सेना):
240570 रथ
240570 गज
721710 घोड़े
1202850 पैदल सैनिक
इस प्रकार महाभारत की सेना के मनुष्यों की संख्या कम से कम 4681920, घोडों की संख्या (रथ में जुते हुओं को लगा कर) 2715620 और इसी अनुपात में गजों की संख्या थी. इससे आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि महाभारत का युद्ध कितना विनाशकारी था.

अरून शुक्ला
वो कुँए का मैला कुचला पानी पिके भी 100 वर्ष जी लेते थे
हम RO का शुद्ध पानी पीकर 40 वर्ष में बुढे हो रहे है।
वो घाणी का मैला सा तैल खाके बुढ़ापे में भी दौड़~मेहनत कर लेते थे।
हम डबल~ट्रिपल फ़िल्टर तैल खाकर जवानी में भी हाँफ जाते है। 
वो डळे वाला लूण खाके बीमार ना पड़ते थे और हम आयोडीन युक्त खाके हाई~लो बीपी लिये पड़े है।
वो निम~बबूल कोयला नमक से दाँत चमकाते थे और 80 वर्ष तक भी चब्बा~चब्बा कर खाते थे
और हम कॉलगेट सुरक्षा वाले रोज डेंटिस्ट के चक्कर लगाते है ।।
वो नाड़ी पकड़ कर रोग बता देते थे और
आज जाँचे कराने पर भी रोग नहीं जान पाते है।
वो 7~8 बच्चे जन्मने वाली माँ 80 वर्ष की अवस्था में भी घर~खेत का काम करती थी
और आज 1महीने से डॉक्टर की देख~रेख में रहते है फिर भी बच्चे पेट फाड़ कर जन्मते है।।
पहले काळे गुड़ की मिठाइयां ठोक ठोक के खा जाते थे
आजकल तो खाने से पहले ही सुगर की बीमारी हो जाती है।
पहले बुजर्गो के भी गोडे मोढे नहीं दुखते थे और जवान भी घुटनो और कन्धों के दर्द से कहराता है ।
और भी बहुत सी समस्याये है फिर भी लोग इसे विज्ञान का युग कहते है, समझ नहीं आता ये विज्ञान का युग है या अज्ञान का ?????
महावीर वैष्णव
की वाल से साभार।
चीन को अब समझ आ रहा कि .. मोदी ने हमला कब का कर दिया था...

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जिन्हें लग रहा है कि रिलायंस ने ये फ्री फ़ोन अचानक लांच कर दिया उन्हें दोबारा सोचने की ज़रूरत पड़ेगी। मोदी ने 3 साल पहले Make in India लांच किया, विदेश की 70+ मोबाइल कंपनियां भारत आयीं और अपनी फैक्टरियां लगाईं ।
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जिस देश मे मोबाइल का स्क्रीन गार्ड, कवर और ग्लास तक नही बनता था वहां अब मोबाइल बनने शुरू हो गए...। अब इन विदेशी कंपनियों ने भारत मे Made in India हैंडसेट बेचने शुरू कर दिए, जिसमे Xiaomi, Gionee, Oppo, Vivo आदि शामिल हैं।
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लेकिन मोदी का ये सपना नही था, उन्हें तो कुछ और चाहिए था, मोदी को भारत की बादशाहत चाहिए थी विश्व बाजार में, तो जब सब ने अपनी अपनी फैक्ट्री लगा ली प्रोडक्शन चालू कर लिया। तब उन्हें विदेशों में माल बेचने के लिए प्रोत्साहित किया गया, टैक्स में छूट दी गयी, नतीजा ये हुआ कि Xiaomi जैसी कंपनी Made in India हैंडसेट को US और Europe में बेचने लगी, बेच तो पहले भी रही थी पर तब चीन में बना हैंडसेट बेचा जा रहा था और अब भारत मे बना, यानी चीन का व्यापार छीन कर भारत ने ले लिया, और ऐसा एक चीनी कंपनी से करवा लिया, चीन की बौखलाहट की वजह यही है।
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अब कल Jio का फ्री फ़ोन लांच हो गया यानी ऐसी 70+ कंपनियों की वाट लग गयी ,अब वे क्या करेंगी? ज़ाहिर है हजारों करोड़ के इन्वेस्टमेंट के बाद ये कंपनियां बंद तो करेंगी नही क्योंकि बंद करने में पूरा पैसा डूब जाएगा,
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अब इन कंपनियों के लिए भारत का बाजार तो खत्म हो गया ऐसे में अब ये सभी कंपनियां एक्सपोर्ट पर दिमाग लगाएंगी, यानी सभी विदेशी कंपनियां अब मोबाइल बनाएंगी भारत मे और बेचेंगी विदेश में, यही तो मोदी का सपना था, यही सही मायने में Make in India है, जहां भारतीयों को काम मिले, माल भारत मे बने और विदेशों में बेचा जाए।
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वैसे फ्री फ़ोन का कांसेप्ट Jio के साथ लांच होना था पर इसे एक साल तक रोके रखा गया, आप इतने समझदार है कि ये समझने की ज़रूरत नही कि क्यों रोका गया । जो लोग अडानी अम्बानी के लिए हर वक़्त गालिया देते है, वो सबसे पहले लाइन में लगे है .. मुफ्त के मोबाइल के लिए .. !!

Hardik Savani

Sunday, 23 July 2017


3 ऐसे भक्त, जिनके शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका

कबीरदास (1398-1518)— 1518 में कबीर ने काशी के पास मगहर में देह त्याग दी। मृत्यु के बाद उनके शव को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। हिन्दू कहते थे कि उनका अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से होना चाहिए और मुस्लिम कहते थे कि मुस्लिम रीति से। इसी विवाद के चलते जब उनके शव पर से चादर हट गई, तब लोगों ने वहाँ फूलों का ढेर पड़ा देखा। बाद में वहाँ से आधे फूल हिन्दुओं ने ले लिए और आधे मुसलमानों ने। मुसलमानों ने मुस्लिम रीति से और हिंदुओं ने हिंदू रीति से उन फूलों का अंतिम संस्कार किया। मगहर में कबीर की समाधि है।

चैतन्य महाप्रभु (1486-1534)— 15 जून, 1534 को रथयात्रा के दिन जगन्नाथपुरी में संकीर्तन करते हुए
वह जगन्नाथ जी में लीन हो गए और शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका I

मीराबाई (1498-1547)— मीराबाई बहुत दिनों तक वृन्दावन में रहीं और जीवन के अंतिम दिनों में द्वारका चली गईं। जहाँ 1547 ई. में वह नाचते-नाचते
श्री रणछोड़राय जी के मन्दिर के गर्भग्रह में प्रवेश कर गईं और मन्दिर के कपाट बन्द हो गये। जब द्वार खोले गये तो देखा कि मीरा वहाँ नहीं थी। उनका चीर मूर्ति के चारों ओर लिपट गया था और मूर्ति अत्यन्त प्रकाशित हो रही थी। मीरा मूर्ति में ही समा गयी थीं। मीराबाई का शरीर भी कहीं नहीं मिला।....

हरि हरि बोल
1 जुलाई